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जब चैटबॉट बना मेरा रियल एस्टेट एजेंट: क्या एजेंटों की जगह ले सकता है एआई? घर बिक्री में AI का सफल प्रयोग
स्टुअर्ट ए थॉम्पसन, द न्यूयॉर्क टाइम्स
Published by: Devesh Tripathi
Updated Sat, 13 Jun 2026 06:25 AM IST
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एआई चैटबॉट बना रियल एस्टेट एजेंट
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अमर उजाला प्रिंट
विस्तार
मैं अपनी कार में बैठा था, तभी एक फोन कॉल आया, जो शायद पांच लाख डॉलर से भी अधिक के सौदे में बदल सकता था। कॉल पर एक रियल एस्टेट एजेंट थी। उसका ग्राहक मेरा घर खरीदने पर विचार कर रहा था। थोड़ी बातचीत के बाद उसने पूछा कि क्या आप वाकई कोई रियल एस्टेट एजेंट नहीं हैं? मैंने जवाब दिया, ‘नहीं।’ वह कुछ पल चुप रही और बोली, ‘आपके ई-मेल, बातचीत का तरीका, पेशेवर भाषा और घर बेचने का मसौदा देखकर तो मुझे लगा कि आप एक अनुभवी एजेंट हैं।’ सच तो यह था कि यह सब मेरा नहीं, बल्कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का काम था।हमारे दूसरे बच्चे के जन्म के समय मैंने और मेरी पत्नी ने अपना घर बेचकर बड़े घर में जाने का फैसला किया। अक्सर लोग घर खरीदने-बेचने के लिए रियल एस्टेट एजेंटों की मदद लेते हैं, पर कई एजेंटों से बातचीत के बाद मेरे मन में उनकी विशेषज्ञता को लेकर कुछ संदेह पैदा हो गया। इसके अलावा, एजेंटों की फीस भी कम नहीं थी। घर की बिक्री होने पर करीब छह प्रतिशत कमीशन देना पड़ता, जो 30,000 डॉलर से अधिक था। तब मेरे मन में सवाल उठा कि क्या यह काम मैं एआई की मदद से खुद नहीं कर सकता?
इसके बाद मैंने घर की जानकारी एआई चैटबॉट को दी और उससे बिक्री का विवरण लिखने को कहा। कुछ ही सेकंड में उसने ऐसा आकर्षक विवरण तैयार कर दिया, जिसे पढ़कर मेरी पत्नी भी प्रभावित हो गई। तब मुझे लगा कि शायद यह प्रयोग सचमुच काम कर सकता है। मैंने चैटबॉट की मदद से घर बेचने की पूरी प्रक्रिया शुरू कर दी। फोटोग्राफर ढूंढने से लेकर घर की सजावट, तस्वीरों की प्रस्तुति, लिस्टिंग की भाषा और कानूनी दस्तावेजों को समझने तक, हर काम में एआई ने मेरा मार्गदर्शन किया। हालांकि, एक बार उसने खरीदार के एजेंट को शून्य कमीशन देने की सलाह देकर गलती भी की, जो नियमों के खिलाफ था। लेकिन, अगर इस एक चूक को छोड़ दें, तो पूरी प्रक्रिया आश्चर्यजनक रूप से आसान साबित हुई। जल्द ही एक नकद खरीद प्रस्ताव सामने आया। फिर, मैंने चैटबॉट से उस प्रस्ताव का जवाब देने का तरीका पूछा, तो उसने समझाया कि बातचीत में कौन-से शब्द आत्मविश्वास दिखाते हैं और कौन-से मुझे नौसिखिया साबित कर सकते हैं। धीरे-धीरे एआई सिर्फ सलाहकार नहीं, बल्कि मेरा रणनीतिक साझेदार बन गया। उसने मुझे मोलभाव, संवाद और निर्णय लेने की ऐसी समझ दी, जो सामान्यतः वर्षों के अनुभव से आती है। पर हां, इसी दौरान मुझे एआई की सीमा भी समझ आई।
दरअसल, जब कुछ खरीदारों ने मेरे घर बेचने के प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया, तो मेरा मनोबल टूटने लगा। तब मैंने एआई से बात की। उसके जवाब तर्कपूर्ण तो थे, लेकिन भावनात्मक नहीं, जबकि मुझे सहानुभूति चाहिए थी। उस समय मेरे दोस्त और परिवार मेरे काम आए। तब मुझे एहसास हुआ कि कुछ परिस्थितियों में मानवीय अनुभव, भरोसा और भावनाएं अब भी जरूरी हैं। कुछ दिनों बाद मेरे पास तीन अच्छे ऑफर थे और तीनों हमारी मांगी गई कीमत से अधिक थे। अब सबसे चुनौतीपूर्ण चरण था-मोलभाव। इस बार भी एआई ने मुझे रास्ता दिखाया। उसने सुझाव दिया कि सबसे अधिक कीमत वाले प्रस्ताव के बजाय उस प्रस्ताव को चुनना बेहतर होगा, जिसके सफल होने की संभावना सबसे अधिक हो। आखिरकार, हमने छह लाख डॉलर से अधिक का प्रस्ताव स्वीकार कर लिया। कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के लिए मैंने एक वकील की मदद ली, पर पूरे सौदे में किसी रियल एस्टेट एजेंट की जरूरत नहीं पड़ी। अंतिम गणना करने पर मैंने पाया कि एआई की मदद से मुझे करीब 90,000 डॉलर का अतिरिक्त लाभ हुआ।
फिर भी, मैं यह दावा नहीं करता कि हर व्यक्ति ऐसा कर सकता है। मैं तकनीक से जुड़ा हूं और एआई को समझना मेरे पेशे का हिस्सा है। इस अनुभव ने मुझे एक महत्वपूर्ण निष्कर्ष दिया कि एआई लोगों को ऐसी क्षमताएं दे सकता है, जो कभी केवल विशेषज्ञों तक सीमित थीं। वह कई पेशों की भूमिका जरूर बदल सकता है, पर अनुभव, जवाबदेही, भावनात्मक समर्थन और मानवीय भरोसे की जगह पूरी तरह नहीं ले सकता।
घर बेचने का मेरा एआई प्रयोग सफल रहा। लेकिन, उसके अंत में मैंने खुद से एक नया सवाल पूछा कि अगर एआई की मदद से मैं घर बेच सकता हूं, तो क्या उसी की मदद से अपना अगला घर भी खरीद सकता हूं? यहीं एआई के साथ मेरा एक प्रयोग समाप्त हुआ और दूसरा शुरू होने वाला था।