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डीएवी छात्रवृत्ति घोटाला: ईडी ने दाखिल की चार्जशीट, कॉलेज के कर्मचारी ने ही की थी 2.27 करोड़ की धोखाधड़ी

माई सिटी रिपोर्टर, देहरादून Published by: Alka Tyagi Updated Wed, 03 Jun 2026 11:47 PM IST
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सार

आरोप है कि अनुसूचित जाति/जनजाति व अन्य पिछड़ा वर्ग के छात्रों के लिए निर्धारित छात्रवृत्ति राशि को देना बैंक में संचालित एक अनधिकृत बैंक खाते के माध्यम से धोखाधड़ी कर हड़प लिया गया।

Dehradun DAV Scholarship Scam ED Files Charge Sheet College Employee Defrauded 2.27 Crore
ईडी ने दाखिल की चार्जशीट - फोटो : freepik.com(प्रतीकात्मक)
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विस्तार

डीएवी छात्रवृत्ति घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने स्पेशल पीएमएलए कोर्ट में चार्जशीट दाखिल कर दी है। वर्ष 2009 से 2014 के बीच एससी-एसटी छात्रों की करीब 2.27 करोड़ रुपये की छात्रवृत्ति को धोखाधड़ी कर हड़प लिया गया था। गत 27 मई को ईडी ने कॉलेज के आरोपी कर्मचारी पीयूष भटनागर की सात लाख रुपये से अधिक की संपत्ति अटैच की थी।


ईडी से मिली जानकारी के अनुसार, पुलिस की एफआईआर और उसके बाद दाखिल चार्जशीट के आधार पर यह जांच शुरू की गई थी।

आरोप है कि अनुसूचित जाति/जनजाति व अन्य पिछड़ा वर्ग के छात्रों के लिए निर्धारित छात्रवृत्ति राशि को देना बैंक में संचालित एक अनधिकृत बैंक खाते के माध्यम से धोखाधड़ी कर हड़प लिया गया। जांच में पाया गया कि वर्ष 2009 से 2014 के बीच इस खाते में छात्रवृत्ति राशि, डीएवी कॉलेज के अन्य खातों से ट्रांसफर की गई। धनराशि और ब्याज सहित लगभग 2.27 करोड़ रुपये जमा हुए।
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धन शोधन निरोधक अधिनियम (पीएमएलए) के तहत हुई जांच में सामने आया कि डीएवी (पीजी) कॉलेज की प्रबंध समिति ने देना बैंक की लक्ष्मी रोड शाखा में खाता खोलने की अनुमति दी थी लेकिन शाखा का नाम धोखाधड़ी से बदलकर देना बैंक, जीएमएस रोड शाखा में एक अनधिकृत खाता खोला गया। यह कार्य कॉलेज कर्मचारी पीयूष चंद्र भटनागर और उसके सहयोगियों ने किया था।
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जांच में यह भी सामने आया कि छात्रवृत्ति प्रभारी के रूप में कार्यरत पीयूष भटनागर ने अपराध से अर्जित धन को छुपाने और उसके उपयोग में अहम भूमिका निभाई। उसने बैंक खाता खोलने की प्रक्रिया में हेरफेर कर स्वयं को खाते का संचालक बनाया। इस तरह उसने छात्रों के लिए निर्धारित छात्रवृत्ति की राशि को अपने खातों में ट्रांसफर कर लिया। अनधिकृत खाते में जमा कुल राशि में से 42.50 लाख रुपये नकद निकाले गए जबकि, 66.50 लाख रुपये विभिन्न व्यक्तियों के नाम पर जारी चेकों के माध्यम से निकाले गए।

करीब एक करोड़ भटनागर के खाते में गए
जांच में पाया गया कि 99.43 लाख रुपये पीयूष चंद्र भटनागर के व्यक्तिगत बैंक खातों में स्थानांतरित किए गए। इसके बाद इस धनराशि को विभिन्न बैंक खातों के माध्यम से लेयरिंग कर बीमा प्रीमियम भुगतान, नकद निकासी, खातों के बीच ट्रांसफर और अन्य निजी उपयोग में लगाया गया। जांच में यह भी पाया गया कि छात्रवृत्ति समन्वयक और डीएवी (पीजी) कॉलेज के बैंक खातों की अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता रंजना रावत ने भी अपराध से अर्जित धन को उत्पन्न करने और उसे वैध दिखाने में सहायक भूमिका निभाई। उन्होंने स्वीकार किया कि देना बैंक खातों से संबंधित कई खाली चेकों पर हस्ताक्षर किए थे जिनका बाद में छात्रवृत्ति राशि निकालने और डायवर्ट करने में उपयोग किया गया।
 
7.86 लाख रुपये की संपत्तियां अटैच
जांच में यह भी सामने आया कि अर्जित धन का एक हिस्सा चल संपत्तियों में परिवर्तित किया गया। इनमें पीयूष चंद्र भटनागर और उसके परिवार के नाम पर बीमा पॉलिसियां, बैंक बैलेंस और एक होंडा एक्टिवा एच-स्मार्ट वाहन शामिल हैं। इसी के तहत गत अस्थायी कुर्की आदेश के माध्यम से 7.86 लाख रुपये मूल्य की चल संपत्तियां अस्थायी रूप से कुर्क की गईं। ईडी ने बैंक रिकॉर्ड, दस्तावेजी साक्ष्य और पीएमएलए के तहत दर्ज बयानों सहित जांच के दौरान इकट्ठा किए गए साक्ष्यों के आधार पर यह चार्जशीट दाखिल कर दी है।

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