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Karnal News: लक्कड़ कारोबारी अशोक मित्तल के घर और ऑफिस पर ईडी की रेड

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 16 Jun 2026 10:37 PM IST
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Ed raid 155 crore scam
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लक्कड़ कारोबारी अशोक मित्तल के घर और ऑफिस पर ईडी की रेड

155.21 करोड़ रुपये के बैंक घोटाले और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में बड़ी कार्रवाई, सुबह पांच बजे पहुंची टीम ने खंगाले दस्तावेज

माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। 155.21 करोड़ रुपये के बैंक घोटाले और मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच कर रही प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मंगलवार सुबह करीब पांच बजे शहर के प्रमुख लकड़ कारोबारी अशोक मित्तल के सेक्टर 13 स्थित निवास और लकड़ मार्केट के कार्यालय पर छापेमारी की। ईडी की इस रेड से शहर के कारोबारी जगत में हलचल मच गई। ईडी की चंडीगढ़ जोनल कार्यालय की टीम मंगलवार सुबह करीब पांच बजे सेक्टर-13 स्थित अशोक मित्तल के आवास और लक्कड़ मार्केट स्थित उनके कार्यालय पहुंची और कई घंटों तक दस्तावेजों की गहन जांच की।
बताया जा रहा है कि यह कार्रवाई महेश टिंबर प्राइवेट लिमिटेड से जुड़े कथित बैंक धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में की गई है। ईडी की टीम के साथ केंद्रीय सुरक्षा बलों के जवान भी मौजूद रहे। सुबह-सुबह हुई इस कार्रवाई की सूचना फैलते ही आसपास के क्षेत्र में लोगों की भीड़ जुटनी शुरू हो गई और दिनभर इस छापेमारी की चर्चा होती रही।
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करनाल से दिल्ली और गोवा तक एक साथ चली कार्रवाई -
ईडी ने केवल करनाल ही नहीं बल्कि हरियाणा, दिल्ली और गोवा में कुल 11 ठिकानों पर एक साथ तलाशी अभियान चलाया। जांच एजेंसी के अनुसार यह सभी स्थान महेश टिंबर प्राइवेट लिमिटेड से जुड़े व्यक्तियों और कारोबारी गतिविधियों से संबंधित हैं। कार्रवाई के दायरे में अशोक मित्तल के अलावा सौरभ ढींगरा, भारत भूषण मित्तल, रमन सिंघल और अन्य संबंधित लोग भी शामिल हैं।
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सूत्रों के अनुसार करनाल स्थित परिसरों में बैंकिंग रिकॉर्ड, कंपनी से जुड़े दस्तावेज, संपत्तियों का ब्यौरा, डिजिटल डेटा, कंप्यूटर हार्ड डिस्क, मोबाइल फोन और वित्तीय लेन-देन से संबंधित कई महत्वपूर्ण रिकॉर्ड की जांच की गई। ईडी अधिकारियों ने कई दस्तावेज अपने कब्जे में भी लिए हैं, जिनकी अब विस्तृत जांच की जाएगी।

सीबीआई की एफआईआर के बाद ईडी ने संभाली जांच-
यह पूरा मामला केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा दर्ज एफआईआर के बाद सामने आया। सीबीआई ने महेश टिंबर प्राइवेट लिमिटेड, उसके निदेशकों और अन्य संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया था। उसी एफआईआर के आधार पर ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज कर जांच शुरू की है।
जांच एजेंसियों का आरोप है कि कंपनी से जुड़े लोगों ने बैंकिंग प्रणाली में हेरफेर कर विदेशी लेटर ऑफ क्रेडिट (एफएलसी) में अनधिकृत संशोधन करवाए। यह संशोधन बैंक के एसडब्ल्यूआईएफटी सिस्टम के माध्यम से किए गए, जबकि बैंक के कोर बैंकिंग प्लेटफॉर्म फिनेकल में उनकी समुचित एंट्री नहीं की गई।


155 करोड़ से अधिक का नुकसान पहुंचाने का आरोप
ईडी के अनुसार इस कथित हेरफेर के जरिए विदेशी व्यापार से संबंधित लेटर ऑफ क्रेडिट की सीमा बढ़ाई गई, जिससे बैंकिंग रिकॉर्ड में भारी अंतर पैदा हुआ। जांच में सामने आया है कि इस प्रक्रिया के कारण तत्कालीन ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स और अन्य बैंकों के कंसोर्टियम को लगभग 155.21 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।
धोखाधड़ी से प्राप्त राशि को विभिन्न माध्यमों से अन्य खातों, कंपनियों और संपत्तियों में स्थानांतरित किया गया हो सकता है। इसी वित्तीय प्रवाह की जांच मनी लॉन्ड्रिंग कानून के तहत की जा रही है।
अशोक मित्तल की भूमिका की जांच पर नजर -
ईडी की इस कार्रवाई के बाद अब जांच एजेंसियों का फोकस अशोक मित्तल और उनसे जुड़े कारोबारी नेटवर्क पर भी है। ईडी यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि कथित बैंक घोटाले से जुड़े लेन-देन, कंपनियों और वित्तीय गतिविधियों में उनकी क्या भूमिका रही है तथा धन के प्रवाह का नेटवर्क किस प्रकार संचालित किया गया।

बताया जा रहा है कि तलाशी के दौरान मिले दस्तावेजों और डिजिटल साक्ष्यों का फोरेंसिक विश्लेषण कराया जाएगा। जांच में अगर नए तथ्य सामने आते हैं तो आगे पूछताछ, संपत्ति जब्ती और अन्य कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है।
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