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Bengal: बंगाल में अवैध हथियारों पर कार्रवाई, CM शुभेंदु बोले- राज्य में अब कानून और लोकतंत्र का राज चलेगा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता
Published by: हिमांशु सिंह चंदेल
Updated Sat, 06 Jun 2026 02:18 PM IST
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सार
Suvendu Adhikari Statement: पश्चिम बंगाल में अवैध हथियारों की बड़ी बरामदगी के बाद मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि पिछले शासन में इन हथियारों का इस्तेमाल लोगों को डराने और राजनीतिक हिंसा फैलाने के लिए किया जाता था। अब राज्य में कानून और लोकतंत्र का राज चलेगा। दक्षिण और उत्तर 24 परगना में हुई छापेमारी में भारी मात्रा में हथियार मिले हैं। आइए, इस पूरे मामले को विस्तार से जानते हैं...
संदेशखाली से बसंती तक पुलिस की ताबड़तोड़ छापेमारी
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
कोलकाता में अवैध हथियारों के बड़े जखीरे की बरामदगी के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति फिर गरमा गई है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने दावा किया है कि राज्य में वर्षों से फैले राजनीतिक आतंक और हिंसा के नेटवर्क पर अब बड़ा प्रहार किया जा रहा है। स्पेशल टास्क फोर्स यानी एसटीएफ ने दक्षिण 24 परगना और संदेशखाली समेत कई इलाकों में छापेमारी कर भारी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद बरामद किया है। मुख्यमंत्री ने इसे कानून व्यवस्था बहाल करने की दिशा में बड़ी सफलता बताया है। उन्होंने कहा कि अब बंगाल में शांति, सुरक्षा और लोकतंत्र का माहौल कायम किया जाएगा।
क्या था एसटीएफ का पूरा ऑपरेशन?
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने बताया कि पुलिस और एसटीएफ को गुप्त सूचना मिली थी कि कुछ इलाकों में बड़ी मात्रा में अवैध हथियार छिपाकर रखे गए हैं। इसके बाद कुमराखाली, बसंती और संदेशखाली के कई इलाकों में लगातार छापेमारी की गई। इन कार्रवाईयों में भारी मात्रा में अवैध बंदूकें, कारतूस और अन्य हथियार बरामद किए गए। पुलिस का मानना है कि इन हथियारों का इस्तेमाल इलाके में डर फैलाने और हिंसा भड़काने के लिए किया जाना था। मुख्यमंत्री ने पुलिस टीम की सराहना करते हुए कहा कि यह कार्रवाई राज्य में अपराध के खिलाफ बड़ी जीत है।
क्या पिछले शासन पर साधा गया निशाना?
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने बिना नाम लिए पिछली सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि पहले के शासन में ऐसे अवैध हथियारों को संरक्षण मिलता था और इन्हीं हथियारों के दम पर आम लोगों को डराया जाता था। अधिकारी ने दावा किया कि राजनीतिक हिंसा की इस संस्कृति में कई विपक्षी कार्यकर्ताओं, खासकर भाजपा कार्यकर्ताओं की जान गई। उन्होंने कहा कि अब वे दिन खत्म हो चुके हैं और उनकी सरकार राज्य से राजनीतिक आतंकवाद को पूरी तरह खत्म करने के लिए काम कर रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी को भी कानून हाथ में लेने की इजाजत नहीं दी जाएगी।
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क्या भांगर बम विस्फोट मामले से जुड़ रहे हैं तार?
इसी बीच राष्ट्रीय जांच एजेंसी यानी एनआईए ने भांगर बम विस्फोट मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए फरार पूर्व विधायक साओकत मोल्ला को गिरफ्तार कर लिया है। यह गिरफ्तारी दक्षिण 24 परगना जिले से की गई। मार्च महीने में विधानसभा चुनाव से पहले बम बनाए जाने के दौरान विस्फोट हुआ था, जिसमें एक व्यक्ति की मौत हो गई थी और कई लोग घायल हुए थे। जांच एजेंसियों का मानना है कि इस मामले में एक बड़ा नेटवर्क काम कर रहा था।एनआईए अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस पूरे मामले के पीछे कौन-कौन लोग शामिल थे।
क्या जांच में सामने आ रही है बड़ी साजिश?
एनआईए की जांच में यह भी सामने आया है कि विस्फोट के बाद घायलों और मृतक को एक स्कॉर्पियो गाड़ी में अस्पताल ले जाया गया था। इस मामले में साइनुर मोल्ला नाम के आरोपी को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है। एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि अवैध हथियारों और बम बनाने के नेटवर्क का राजनीतिक कनेक्शन कितना गहरा है। गृह मंत्रालय के निर्देश पर एनआईए इस पूरे मामले की जांच कर रही है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने साफ कहा कि राज्य में अवैध हथियार रखने वालों के खिलाफ आगे भी सख्त अभियान जारी रहेगा और हर जिले में ऐसी कार्रवाई तेज की जाएगी।
अवैध हथियारों की बरामदगी और एनआईए की कार्रवाई के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में नया टकराव शुरू होने के संकेत मिल रहे हैं। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी लगातार कानून व्यवस्था को लेकर सख्त रुख दिखा रहे हैं, जबकि विपक्ष इस मुद्दे पर सरकार पर राजनीतिक आरोप लगाने का आरोप लगा सकता है। हालांकि सरकार का कहना है कि उसका मकसद सिर्फ राज्य को हिंसा मुक्त बनाना है।
क्या था एसटीएफ का पूरा ऑपरेशन?
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने बताया कि पुलिस और एसटीएफ को गुप्त सूचना मिली थी कि कुछ इलाकों में बड़ी मात्रा में अवैध हथियार छिपाकर रखे गए हैं। इसके बाद कुमराखाली, बसंती और संदेशखाली के कई इलाकों में लगातार छापेमारी की गई। इन कार्रवाईयों में भारी मात्रा में अवैध बंदूकें, कारतूस और अन्य हथियार बरामद किए गए। पुलिस का मानना है कि इन हथियारों का इस्तेमाल इलाके में डर फैलाने और हिंसा भड़काने के लिए किया जाना था। मुख्यमंत्री ने पुलिस टीम की सराहना करते हुए कहा कि यह कार्रवाई राज्य में अपराध के खिलाफ बड़ी जीत है।
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क्या पिछले शासन पर साधा गया निशाना?
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने बिना नाम लिए पिछली सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि पहले के शासन में ऐसे अवैध हथियारों को संरक्षण मिलता था और इन्हीं हथियारों के दम पर आम लोगों को डराया जाता था। अधिकारी ने दावा किया कि राजनीतिक हिंसा की इस संस्कृति में कई विपक्षी कार्यकर्ताओं, खासकर भाजपा कार्यकर्ताओं की जान गई। उन्होंने कहा कि अब वे दिन खत्म हो चुके हैं और उनकी सरकार राज्य से राजनीतिक आतंकवाद को पूरी तरह खत्म करने के लिए काम कर रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी को भी कानून हाथ में लेने की इजाजत नहीं दी जाएगी।
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इसी बीच राष्ट्रीय जांच एजेंसी यानी एनआईए ने भांगर बम विस्फोट मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए फरार पूर्व विधायक साओकत मोल्ला को गिरफ्तार कर लिया है। यह गिरफ्तारी दक्षिण 24 परगना जिले से की गई। मार्च महीने में विधानसभा चुनाव से पहले बम बनाए जाने के दौरान विस्फोट हुआ था, जिसमें एक व्यक्ति की मौत हो गई थी और कई लोग घायल हुए थे। जांच एजेंसियों का मानना है कि इस मामले में एक बड़ा नेटवर्क काम कर रहा था।एनआईए अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस पूरे मामले के पीछे कौन-कौन लोग शामिल थे।
क्या जांच में सामने आ रही है बड़ी साजिश?
एनआईए की जांच में यह भी सामने आया है कि विस्फोट के बाद घायलों और मृतक को एक स्कॉर्पियो गाड़ी में अस्पताल ले जाया गया था। इस मामले में साइनुर मोल्ला नाम के आरोपी को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है। एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि अवैध हथियारों और बम बनाने के नेटवर्क का राजनीतिक कनेक्शन कितना गहरा है। गृह मंत्रालय के निर्देश पर एनआईए इस पूरे मामले की जांच कर रही है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने साफ कहा कि राज्य में अवैध हथियार रखने वालों के खिलाफ आगे भी सख्त अभियान जारी रहेगा और हर जिले में ऐसी कार्रवाई तेज की जाएगी।
अवैध हथियारों की बरामदगी और एनआईए की कार्रवाई के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में नया टकराव शुरू होने के संकेत मिल रहे हैं। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी लगातार कानून व्यवस्था को लेकर सख्त रुख दिखा रहे हैं, जबकि विपक्ष इस मुद्दे पर सरकार पर राजनीतिक आरोप लगाने का आरोप लगा सकता है। हालांकि सरकार का कहना है कि उसका मकसद सिर्फ राज्य को हिंसा मुक्त बनाना है।