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Droupadi Murmu: सिक्किम में महिलाओं को मिली खास बस सेवा, राष्ट्रपति ने दिखाई 'आमा दिदी बहिनी' बसों को हरी झंडी
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सार
सिक्किम में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने महिलाओं के लिए विशेष ‘आमा दिदी बहिनी’ बस सेवा शुरू की। इस सेवा की खास बात यह है कि बसों का संचालन पूरी तरह महिला चालक और महिला स्टाफ करेंगे। बसों में सीसीटीवी, एसी और मोबाइल चार्जिंग जैसी सुविधाएं दी गई हैं। सरकार ने इसे महिला सुरक्षा, आत्मनिर्भरता और सार्वजनिक जीवन में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम बताया है।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
सिक्किम में महिलाओं की सुरक्षा और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। राष्ट्रपति u ने बुधवार को गंगटोक में महिलाओं के लिए विशेष पिंक सिटी रनर आमा दिदी बहिनी बस सेवा’ की शुरुआत की। इस बस सेवा की सबसे खास बात यह है कि बसों का संचालन पूरी तरह महिलाओं के हाथ में होगा। बस की चालक से लेकर स्टाफ तक सभी महिलाएं होंगी। राज्य सरकार ने इसे महिला सशक्तीकरण और सुरक्षित सार्वजनिक परिवहन की दिशा में ऐतिहासिक पहल बताया है।
आखिर आमा दिदी बहिनी बस सेवा की खासियत क्या है?
गंगटोक के रिज पार्क में आयोजित कार्यक्रम में राज्यपाल ओम प्रकाश माथुर और मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग भी मौजूद रहे। यह बस सेवा रणीपूल से सचिवालय तक करीब 12 किलोमीटर के मार्ग पर चलाई जाएगी। महिलाओं के लिए इस सफर का किराया 25 रुपये रखा गया है। बसों में सुरक्षा और सुविधा को ध्यान में रखते हुए सीसीटीवी कैमरे, मोबाइल चार्जिंग प्वाइंट और एयर कंडीशनिंग जैसी सुविधाएं दी गई हैं। सरकार का कहना है कि इसका उद्देश्य महिलाओं को सुरक्षित और सम्मानजनक यात्रा उपलब्ध कराना है।
महिलाओं के लिए यह पहल क्यों मानी जा रही बड़ी?
मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग ने कहा कि महिलाओं को सुरक्षित और सस्ती यात्रा देना सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि कई महिलाएं और छात्राएं भीड़भाड़ वाली बसों में सफर के दौरान असहज महसूस करती थीं। ऐसे में यह नई सेवा उनके लिए राहत लेकर आई है। सरकार का मानना है कि सुरक्षित परिवहन मिलने से महिलाएं शिक्षा, नौकरी और सामाजिक गतिविधियों में ज्यादा भागीदारी कर सकेंगी। इसे लैंगिक समानता की दिशा में भी अहम कदम माना जा रहा है।
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महिला यात्रियों ने क्या प्रतिक्रिया दी?
बस सेवा शुरू होने के बाद कई महिलाओं और छात्राओं ने खुशी जाहिर की। कॉलेज जाने वाली छात्राओं का कहना है कि अब उन्हें सफर के दौरान ज्यादा सुरक्षित महसूस होगा। कामकाजी महिलाओं ने भी कहा कि महिला चालक और महिला स्टाफ होने से आत्मविश्वास बढ़ा है। कई यात्रियों ने माना कि सार्वजनिक परिवहन में महिलाओं के लिए अलग और सुरक्षित व्यवस्था लंबे समय से जरूरी थी।
सरकार ने इस योजना को कैसे तैयार किया?
सूत्रों के मुताबिक, इस योजना को तैयार करते समय महिलाओं की सुरक्षा, कम किराया और आरामदायक सफर को सबसे ज्यादा प्राथमिकता दी गई। राज्य सरकार पहले भी महिला सुरक्षा को लेकर कई कदम उठा चुकी है। मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग ने कहा कि सरकार चाहती है कि महिलाएं बिना डर और परेशानी के कहीं भी आ-जा सकें। इसी सोच के तहत इस बस सेवा को शुरू किया गया है।
भविष्य में सिक्किम के दूसरे शहरों और इलाकों में भी ऐसी महिला विशेष बस सेवाएं शुरू की जा सकती हैं। देश के कई राज्यों में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर लगातार चिंता जताई जाती रही है। ऐसे में सिक्किम की यह पहल दूसरे राज्यों के लिए भी उदाहरण बन सकती है। सरकार को उम्मीद है कि यह सेवा महिलाओं के आत्मविश्वास और सार्वजनिक जीवन में भागीदारी को और मजबूत करेगी।
आखिर आमा दिदी बहिनी बस सेवा की खासियत क्या है?
गंगटोक के रिज पार्क में आयोजित कार्यक्रम में राज्यपाल ओम प्रकाश माथुर और मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग भी मौजूद रहे। यह बस सेवा रणीपूल से सचिवालय तक करीब 12 किलोमीटर के मार्ग पर चलाई जाएगी। महिलाओं के लिए इस सफर का किराया 25 रुपये रखा गया है। बसों में सुरक्षा और सुविधा को ध्यान में रखते हुए सीसीटीवी कैमरे, मोबाइल चार्जिंग प्वाइंट और एयर कंडीशनिंग जैसी सुविधाएं दी गई हैं। सरकार का कहना है कि इसका उद्देश्य महिलाओं को सुरक्षित और सम्मानजनक यात्रा उपलब्ध कराना है।
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बस सेवा की खास बातें |
जानकारी |
|---|---|
बस सेवा का नाम |
आमा दिदी बहिनी बस सेवा |
मार्ग |
रणीपूल से सचिवालय |
दूरी |
करीब 12 किलोमीटर |
किराया |
25 रुपये |
विशेष सुविधा |
महिला चालक और महिला स्टाफ |
सुरक्षा व्यवस्था |
सीसीटीवी, एसी, मोबाइल चार्जिंग |
महिलाओं के लिए यह पहल क्यों मानी जा रही बड़ी?
मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग ने कहा कि महिलाओं को सुरक्षित और सस्ती यात्रा देना सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि कई महिलाएं और छात्राएं भीड़भाड़ वाली बसों में सफर के दौरान असहज महसूस करती थीं। ऐसे में यह नई सेवा उनके लिए राहत लेकर आई है। सरकार का मानना है कि सुरक्षित परिवहन मिलने से महिलाएं शिक्षा, नौकरी और सामाजिक गतिविधियों में ज्यादा भागीदारी कर सकेंगी। इसे लैंगिक समानता की दिशा में भी अहम कदम माना जा रहा है।
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महिला यात्रियों ने क्या प्रतिक्रिया दी?
बस सेवा शुरू होने के बाद कई महिलाओं और छात्राओं ने खुशी जाहिर की। कॉलेज जाने वाली छात्राओं का कहना है कि अब उन्हें सफर के दौरान ज्यादा सुरक्षित महसूस होगा। कामकाजी महिलाओं ने भी कहा कि महिला चालक और महिला स्टाफ होने से आत्मविश्वास बढ़ा है। कई यात्रियों ने माना कि सार्वजनिक परिवहन में महिलाओं के लिए अलग और सुरक्षित व्यवस्था लंबे समय से जरूरी थी।
सरकार ने इस योजना को कैसे तैयार किया?
सूत्रों के मुताबिक, इस योजना को तैयार करते समय महिलाओं की सुरक्षा, कम किराया और आरामदायक सफर को सबसे ज्यादा प्राथमिकता दी गई। राज्य सरकार पहले भी महिला सुरक्षा को लेकर कई कदम उठा चुकी है। मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग ने कहा कि सरकार चाहती है कि महिलाएं बिना डर और परेशानी के कहीं भी आ-जा सकें। इसी सोच के तहत इस बस सेवा को शुरू किया गया है।
भविष्य में सिक्किम के दूसरे शहरों और इलाकों में भी ऐसी महिला विशेष बस सेवाएं शुरू की जा सकती हैं। देश के कई राज्यों में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर लगातार चिंता जताई जाती रही है। ऐसे में सिक्किम की यह पहल दूसरे राज्यों के लिए भी उदाहरण बन सकती है। सरकार को उम्मीद है कि यह सेवा महिलाओं के आत्मविश्वास और सार्वजनिक जीवन में भागीदारी को और मजबूत करेगी।