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यूपी : मानव तस्करी के मामले में आतंकवाद निरोधक दस्ते ने नौ और लोगों को किया गिरफ्तार, अब तक 18 शिकंजे में
अमर उजालाा ब्यूरो, लखनऊ
Published by: ishwar ashish
Updated Mon, 13 Dec 2021 09:53 PM IST
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सार
12 अक्तूबर को एक गिरोह का भंडाफोड़ एटीएस ने किया था जो बांग्लादेश और म्यांमार से अवैध तरीके से लोगों को भारतीय सीमा में प्रवेश कराते थे और नाम बदलकर भारतीय नागरिकता का फर्जी दस्तावेज बनवाकर उसके पासपोर्ट बनवा लेते थे। उन पासपोर्ट के जरिए इनकी तस्करी विदेशों में कर दी जाती थी।
प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
अवैध तरीके से भारतीय सीमा में प्रवेश कराकर बंग्लादेश और म्यांमार के लोगों की विदेशों में तस्करी करने के मामले में उत्तर प्रदेश आतंकवाद निरोधक दस्ते ने नौ और लोगों को गिरफ्तार किया है। इसमें मुख्य सरगना महफुजुर्रहमान को पश्चिम बंगाल से गिरफ्तार किया गया है। फहफर्जुरहमान द्वारा आठ लोगों को फर्जी दस्तावेज के जरिए दुबई भेजा जा रहा था। एटीएस ने कोलकाता से दिल्ली जा रही ट्रेन में छापा मारकर उक्त सभी आठ लोगों को गिरफ्तार कर लिया।
आतंकवाद निरोधक दस्ते के पुलिस महानिरीक्षक जीके गोस्वामी ने बताया कि 12 अक्तूबर को एक गिरोह का भंडाफोड़ एटीएस ने किया था जो बांग्लादेश और म्यांमार से अवैध तरीके से लोगों को भारतीय सीमा में प्रवेश कराते थे और नाम बदलकर भारतीय नागरिकता का फर्जी दस्तावेज बनवाकर उसके पासपोर्ट बनवा लेते थे। उन पासपोर्ट के जरिए इनकी तस्करी विदेशों में कर दी जाती थी। इस गिरोह में शामिल नौ लोग पहले ही गिरफ्तार किए जा चुके हैं। महानिरीक्षक ने बताया कि पूर्व में पकड़े गए अभियुक्तों से पूछताछ में महफजुर्रहमान और रतन मंडल का नाम प्रकाश में आया था, जिनकी तलाश की जा रही थी।
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सर्विलांस के जरिए आठ लोगों को पश्चिम बंगाल से तस्करी कर विदेश भेजे जाने के बारे में जानकारी मिली जिसके बाद आतंकवाद निरोधक दस्ते की वाराणसी इकाई को सक्रिय किया गया। इस टीम ने राजधानी एक्सप्रेस से कोलकाता से दिल्ली जा रहे आठ लोगों को कानपुर में दबोच लिया। जिन आठ लोगों को पकड़ा गया है उसमें गोलक मंडल उर्फ शेखावत, मानिक दत्ता उर्फहुसैन मोहम्मद फहद, विजय दास उर्फअरशद उल इस्लाम, राजेश विश्वास उर्फ अल अमीन, गोविंद दास उर्फ जबुल हुसैन, रिंकू विश्वास उर्फ तारिक और अजीत दास उर्फराजिब हुसैन शामिल है। इन सभी ने अपना नाम बदलकर हिंदू नाम से भारतीय दस्तावेज बनवाए और पासपोर्ट हासिल कर दुबई जा रहे थे। इन सबके पासपोर्ट पर दुबई का वीजा भी लगा था।
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गोस्वामी ने बताया कि बांग्लादेश और म्यांमार से खाड़ी के देशों का या किसी अन्य देश का वीजा मिलने में मुश्किल होता है। रेटिंग कम होने की वजह से इन लोगों को विदेशों में नौकरी मिलना भी मुश्किल होता है। वहीं भारतीय वीजा हासिल करने के बाद विदेशों में थोड़ी बेहतर नौकरी मिल जाती है। इसी लालच में यह लोग मोटा पैसा खर्च कर भारत के रास्ते फर्जी दस्तावेज बनवा कर विदेश जाने को वरीयता देते हैं। उन्होंने बताया कि एक व्यक्ति विदेश जाने के नाम पर एक लाख रुपये से सात लाख रुपये तक खर्च करता है। जिन आठ लोगों को गिरफ्तार किया गया है इन लोगों ने भी एक-एक लाख रुपये खर्च किए थे। इसमें बांग्लादेश से भारतीय सीमा में प्रवेश कराना, फर्जी दस्तावेज बनवाना और पासपोर्ट बनवाना शामिल था। उन्होंने बताया कि इस गिरोह के अब तक 18 सदस्यों को गिरफ्तार किया जा चुका है। जो न सिर्फ खाड़ी के देशों में लोगों को भेजते हैं बल्कि दक्षिण अफ्रीका, अमेरिका और ब्रिटेन भी भेजते हैं। उन्होंने बताया कि यह गिरोह न सिर्फ पश्चिम बंगाल में सक्रिय है बल्कि बांग्लादेश, म्यांमार, दिल्ली, विभिन्न एयरलाइंस, दक्षिण अफ्रीका, अमेरिका और ब्रिटेन में भी इस गिरोह के लोग सक्रिय हैं।
गिरोह के लोगों के पाकिस्तानियों से भी संबंध, जांच जारी
जीके गोस्वामी ने बताया कि पश्चिम बंगाल से गिरफ्तार किया गया महफजुर्रहमान 2010 में अवैध तरीके से भारतीय सीमा में प्रवेश किया था। 2013 में वह दुबई गया। दुबई से लौटने के बाद वह इसी धंधे में शामिल हो गया। उन्होंने बताया कि महफजुर्रहमान पश्चिम बंगाल में खाली पड़े मदरसों में अवैध तरीके से बांग्लादेश की सीमा पार कराकर लाए गए लोगों को रखा जाता है। यहीं के पतों पर इन लोगों के फर्जी दस्तावेज बनवाए जाते थे। कहीं परेशानी न हो इस लिए बांग्लादेशियों और रोहिंग्यों को यहां हिंदी भी सिखाई जाती थी। बीते तीन चार साल से वह इस काम को अंजाम दे रहा है। महफुजुर्रहमान के संबंध पाकिस्तानियों से भी होने की बात सामने आई है, जिसकी तस्दीक की जा रही है।