देवरिया कांड: डीएम और पूर्व डीपीओ पर कार्रवाई, सभी जिलाधिकारियों से सीएम ने मांगी रिपोर्ट
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देवरिया के मां विंध्यावासिनी बालिका संरक्षण गृह में बालिकाओं से देह व्यापार के खुलासे पर राज्य सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है। मुख्यमंत्री ने देवरिया के डीएम सुजीत कुमार को हटा दिया है और पूर्व जिला प्रोबेशन अधिकारी (डीपीओ) अभिषेक पांडेय को निलंबित कर दिया है।
प्रभारी डीपीओ रहे नीरज कुमार व अनुज सिंह के खिलाफ भी विभागीय कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। अफसरों पर कार्रवाई के साथ ही मुख्यमंत्री के निर्देश पर सोमवार सुबह ही अपर मुख्य सचिव महिला कल्याण रेणुका कुमार और अपर पुलिस महानिदेशक (महिला हेल्पलाइन) अंजू जोशी की टीम बनाकर हेलीकाप्टर से देवरिया रवाना किया गया।
दोनों अधिकारियों को वहीं रुककर पूरे प्रकरण का जांच कर मंगलवार तक रिपोर्ट सौंपने के लिए कहा गया है। उनकी जांच के बाद कुछ और अफसरों पर गाज गिरने की संभावना जताई जा रही है। शासन ने सोमवार को ही एटा के जिलाधिकारी अमित किशोर को देवरिया का जिलाधिकारी बनाया है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार सुबह ही अपने सरकारी आवास पर महिला कल्याण मंत्री डॉ. रीता बहुगुणा जोशी, मुख्य सचिव अनूप चन्द्र पांडेय, अपर मुख्य सचिव महिला कल्याण रेणुका कुमार, गृह सचिव अरविंद कुमार व एडीजी कानून-व्यवस्था आनंद कुमार को तलब कर पूरे प्रकरण की जानकारी ली।
उन्होंने दोषी अधिकारियों के खिलाफ तत्काल कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री के निर्देश पर पूर्व जिला प्रोबेशन अधिकारी (डीपीओ) अभिषेक पांडेय को तत्काल प्रभाव निलंबित कर दिया गया है। डीएम को हटा दिया गया।
मुख्यमंत्री ने अवैध तरीके से संचालित इस बालिका संरक्षण गृह के खिलाफ कार्रवाई न करने के लिए शासन से लेकर जिला स्तर के अधिकारियों को जमकर फटकार लगाई है।
उच्च स्तरीय बैठक के बाद डॉ. रीता बहुगुणा जोशी ने पत्रकारों को बताया कि मुख्यमंत्री के निर्देश पर देवरिया भेजी गईं अपर मुख्य सचिव व एडीजी (महिला हेल्पलाइन) रात को वहीं रुकेंगी और संरक्षण गृह की सभी बालिकाओं से अलग-अलग बात करेंगी। पूरा ब्यौरा जुटाकर अपनी रिपोर्ट तैयार करेंगी।
उनकी रिपोर्ट मिलने के बाद अन्य दोषी अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। डीएम के खिलाफ कार्रवाई के बारे में पूछे जाने पर मंत्री ने बताया कि अपर मुख्य सचिव की जांच रिपोर्ट के आने के बाद ही डीएम पर अगली कार्रवाई की जाएगी। मुख्यमंत्री द्वारा गठित उच्चस्तरीय जांच कमेटी की मदद के लिए गोरखपुर के मंडलायुक्त को भी लगाया गया है।
सभी डीएम से भी 12 घंटे में मांगी रिपोर्ट
3 जुलाई को निर्देश दिए जाने के बाद भी बाल व महिला संरक्षण गृहों के निरीक्षण की रिपोर्ट न दिए जाने पर भी मुख्यमंत्री ने कड़ी नाराजगी जताई है। उन्होंने सभी डीएम को 12 घंटे की मोहलत देते हुए अपने-अपने जिलों के महिला संरक्षण गृहों का निरीक्षण करके रिपोर्ट भेजने का निर्देश दिए है। मुख्यमंत्री ने डीएम को सभी सरकारी व गैर सरकारी संरक्षण गृहों की जांच करने के लिए कहा है। उन्होंने कहा है कि इस समय सीमा में जांच रिपोर्ट न देने वाले डीएम के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।
अवैध तरीके से चल रहा था नारी संरक्षण गृह: रीता जोशी
महिला कल्याण मंत्री रीता बहुगुणा जोशी ने स्वीकार किया कि यह नारी संरक्षण गृह अवैध रुप से संचालित किया जा रहा था। इसके खिलाफ कार्रवाई के लिए शासन स्तर से अब तक दर्जनों नोटिस जारी किए जा चुके हैं। उन्होंने कहा, मामला बेहद गंभीर है और मुख्यमंत्री के निर्देश पर दो वरिष्ठ अधिकारियों की उच्चस्तरीय कमेटी का गठन कर जांच के लिए मौके पर भेजा गया है। कमेटी की जांच रिपोर्ट आने के बाद ही पता चलेगा कि नारी संरक्षण गृह में देह व्यापार होता था या नहीं। बार-बार नोटिस के बाद भी कार्रवाई नहीं होने के बाद भी शासन स्तर से संज्ञान न लेने के बारे में पूछे जाने पर महिला कल्याण मंत्री ने कहा कि जांच के बाद ही अधिकारियों की जिम्मेदारी तय कर कार्रवाई की जाएगी।
त्वरित कार्रवाई की
एडीजी कानून व्यवस्था आनंद कुमार ने कहा कि इस मामले में पुलिस ने त्वरित कार्रवाई की है। गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। मुक्त कराई गई लड़कियों का मेडिकल चेकअप कराया जा रहा है। जेजे एक्ट के तहत इन लड़कियों की काउंसिलिंग कराई जाएगी। फिर न्यायालय के समझ 164 का बयान दर्ज कराया जाएगा।