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ईद पर इको फ्रेंडली बकरेः हिंदू संगठन बोला- जब गणेशोत्सव-नवरात्रि इको फ्रेंडली हो सकते हैं, तो ईद क्यों नहीं?
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
Published by: Sandeep Kumar Tiwari
Updated Wed, 27 May 2026 05:05 PM IST
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सार
भोपाल में श्री हिंदू उत्सव समिति ने बकरीद से पहले मिट्टी से बने इको फ्रेंडली बकरे बाजार में उतारे हैं। समिति का कहना है कि जब गणेशोत्सव और नवरात्रि इको फ्रेंडली हो सकते हैं, तो ईद क्यों नहीं। संगठन ने मुस्लिम समाज से प्रतीकात्मक कुर्बानी की अपील करते हुए इसे पर्यावरण संरक्षण और पानी बचाने की पहल बताया।
प्रतीकात्मक इको फ्रेंडली बकरे
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
श्री हिंदू उत्सव समिति और संस्कृति बचाओ मंच ने बकरीद से पहले राजधानी भोपाल में इको फ्रेंडली ईद को लेकर नई पहल शुरू की है। समिति ने पहली बार बाजार में मिट्टी से बने प्रतीकात्मक इको फ्रेंडली बकरे उतारे हैं। शहर के अलग-अलग इलाकों में इन बकरों की बिक्री की व्यवस्था की गई है। समिति का कहना है कि फिलहाल 12 मिट्टी के बकरे तैयार किए गए हैं और जैसे-जैसे ऑर्डर मिलेंगे, वैसे-वैसे और बकरे बनाए जाएंगे। हर बकरे की कीमत करीब 1000 रुपए रखी गई है। संगठन का दावा है कि यह पहल पर्यावरण संरक्षण, जल बचत और स्वच्छता को ध्यान में रखकर शुरू की गई है।
हर जीव में प्राण, आत्मा में परमात्मा का वास
समिति के अध्यक्ष चंद्रशेखर तिवारी का कहना है कि कण-कण में भगवान हैं और हर जीव में प्राण होते हैं। उनका कहना है कि जिस तरह गणेशोत्सव, नवरात्रि, होली और दीपावली जैसे त्योहारों को इको फ्रेंडली बनाने की मुहिम चलाई गई, उसी तरह ईद पर भी प्रतीकात्मक कुर्बानी की पहल हो सकती है। समिति ने मुस्लिम समाज से अपील करते हुए कहा है कि अगर लोग मिट्टी के प्रतीकात्मक बकरों की कुर्बानी देंगे तो इससे हजारों जीवों की हत्या रुक सकती है, लाखों गैलन पानी की बचत होगी और शहरों में गंदगी व प्रदूषण भी कम होगा।
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इको फ्रेंडली ईद से पर्यावरण को फायदा होगा
समिति के अध्यक्ष चंद्रशेखर तिवारी ने कहा कि यह अभियान पिछले तीन वर्षों से चलाया जा रहा है। उनका कहना है कि लगातार प्रयासों से समाज में बदलाव आता है और अगर कुछ लोग भी इस पहल को स्वीकार करते हैं तो इसे बड़ी सफलता माना जाएगा। उन्होंने कहा कि जब गणेश चतुर्थी और नवरात्रि जैसे त्योहार इको फ्रेंडली हो सकते हैं, तो ईद क्यों नहीं? तिवारी ने पशु संरक्षण से जुड़ी संस्थाओं और संगठनों से भी इस अभियान का समर्थन करने की अपील की।
यह भी पढ़ें-दिग्विजय बोले सरकार का रवैया ब्रिटिश हुकूमत जैसा, विरोध करने वालों को आज भी किया जा रहा प्रताड़ित
मकसद विरोध नहीं, पर्यावरण संरक्षण
समिति ने साफ किया है कि उनका उद्देश्य किसी धर्म विशेष की भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और प्रतीकात्मक कुर्बानी का संदेश देना है। बकरीद से पहले शुरू हुई इस पहल को लेकर भोपाल में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है।
हर जीव में प्राण, आत्मा में परमात्मा का वास
समिति के अध्यक्ष चंद्रशेखर तिवारी का कहना है कि कण-कण में भगवान हैं और हर जीव में प्राण होते हैं। उनका कहना है कि जिस तरह गणेशोत्सव, नवरात्रि, होली और दीपावली जैसे त्योहारों को इको फ्रेंडली बनाने की मुहिम चलाई गई, उसी तरह ईद पर भी प्रतीकात्मक कुर्बानी की पहल हो सकती है। समिति ने मुस्लिम समाज से अपील करते हुए कहा है कि अगर लोग मिट्टी के प्रतीकात्मक बकरों की कुर्बानी देंगे तो इससे हजारों जीवों की हत्या रुक सकती है, लाखों गैलन पानी की बचत होगी और शहरों में गंदगी व प्रदूषण भी कम होगा।
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समिति के अध्यक्ष चंद्रशेखर तिवारी ने कहा कि यह अभियान पिछले तीन वर्षों से चलाया जा रहा है। उनका कहना है कि लगातार प्रयासों से समाज में बदलाव आता है और अगर कुछ लोग भी इस पहल को स्वीकार करते हैं तो इसे बड़ी सफलता माना जाएगा। उन्होंने कहा कि जब गणेश चतुर्थी और नवरात्रि जैसे त्योहार इको फ्रेंडली हो सकते हैं, तो ईद क्यों नहीं? तिवारी ने पशु संरक्षण से जुड़ी संस्थाओं और संगठनों से भी इस अभियान का समर्थन करने की अपील की।
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मकसद विरोध नहीं, पर्यावरण संरक्षण
समिति ने साफ किया है कि उनका उद्देश्य किसी धर्म विशेष की भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और प्रतीकात्मक कुर्बानी का संदेश देना है। बकरीद से पहले शुरू हुई इस पहल को लेकर भोपाल में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है।

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