बेशक हिमाचल में चार कोस बाद बोली बदल जाती हो, मगर लोक गायक इंद्रजीत की गायकी ने बोलियों के इस भेद को मिटा दिया है। उनके ठेठ कुल्लवी लोकगीतों का जादू यहां हर बोली के बच्चों-बुजुर्गों समेत तमाम प्रशंसकों के सिर चढ़कर बोलता है।
लोक गायक इंद्रजीत का सोशल मीडिया पर धमाल, देखें भाषा का रिमिक्स
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उनकी आवाज के इस जलवे के पीछे नमित कपूर एक्टिंग (लैब) इंस्टीट्यूट मुंबई में अभिनय का प्रशिक्षण ले चुके सुरेश सुर की खास मेहनत है। इस संस्थान में बाजीराव मस्तानी, रामलीला समेत कई फिल्मों के नायक रहे रणवीर सिंह के साथ सुरेश सुर कक्षाएं लगा चुके हैं।
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कुल्लू निवासी सुरेश ने कई सीरियलों और फिल्मों में भी काम किया। उनके निर्देशन में इंद्रजीत के गीतों को यू-ट्यूब पर करोड़ों बार देखा-सुना जा चुका है। इंद्रजीत के ‘लाड़ी शावणिए’, ‘बुधुआ मामा’, ‘सोलमा’, ‘साजा लागा माघे रा’ जैसे दर्जनों गीतों के खूब जलवे हैं।
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उनका लाड़ी शावणिए लोकगीत यू-ट्यूब पर करीब 38 लाख, बुधुआ मामा साढे़ 35 लाख, सोलमा 26 लाख और साजा लागा माघे रा लगभग 24 लाख बार देखा जा चुका है। यह फेहरिस्त बहुत लंबी है। 26 वर्षीय इंद्रजीत ने बताया कि गीतों को तीन करोड़ से अधिक व्यूवर्स देख चुके हैं। सुरेश सुर साथ न होते तो यह मुकाम न होता। हम दोनों ने जेब से पैसे लगाए। कुल्लू की लग वैली का मीलों पैदल सफर किया। पुराने मकानों और ठेठ पहाड़ी लोगों पर फिल्मांकन किया।
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आज खुशी है कि जो लोग पहाड़ी गायकी से खिलवाड़ पर निराश थे, वे हमारी पीठ थपथपा रहे हैं।’ 35 वर्षीय सुरेश सुर का कहना है, ‘मोहब्बत मुझे वापस कुल्लू खींच लाई। मैंने इंदु से प्रेम विवाह किया। मेरे आई सुर स्टूडियो का जो ‘आई’ है, वह मेरी पत्नी का प्रथम नामाक्षर ही है। शादी के बाद महंगे कैमरे खरीदे। इंद्र ने अपनी गायकी पर खुद मेहनत की। मैंने वीडियो ऐसे बनाए कि इन्हें ज्यादा से ज्यादा लोग देखें।’
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