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Patient Rights: क्या अस्पताल मरीज की मौत के बाद बिल बकाया होने के कारण शव को रोक सकता है? जानें कानूनी अधिकार

यूटिलिटी डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Shikhar Baranawal Updated Wed, 27 May 2026 06:16 PM IST
सार

Can Hospital Hold Dead Body Over Unpaid Bills: अस्पतालों में अक्सर ऐसे मामले देखने को मिलते हैं, जहां मरीज की मौत के बाद शव देने के लिए लोग बिल जमा करने की मांग रखते हैं। आइए इस लेख में समझते हैं कि ऐसी स्थिति में आपके क्या अधिकार हैं?

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Legality of Retaining Dead Body over Unpaid Bills: Your Rights Against Hospital Detention Practices in India
अस्पताल बकाया बिल के लिए शव रोक सकता है? - फोटो : AI

Hospital Retaining Dead Body Legality India: अक्सर देखा जाता है कि किसी मरीज की मौत के बाद अस्पताल प्रबंधन बकाया बिल का भुगतान न होने तक शव को परिजनों को सौंपने से इनकार कर देता है। दुख की इस घड़ी में आम इंसान अस्पताल की इस मनमानी के आगे बेबस हो जाता है और कर्ज लेकर या मिन्नतें करके बिल चुकाने को मजबूर होता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि कानूनन कोई भी अस्पताल बकाया पैसे के लिए किसी मृत इंसान के शव को बंधक बनाकर नहीं रख सकता? 



भारतीय न्याय व्यवस्था और मानवाधिकारों के अनुसार यह एक बेहद गंभीर और गैर-कानूनी कृत्य है। आइए बेहद सरल शब्दों में जानते हैं कि इस विषय पर देश की अदालतों के फैसले क्या हैं और एक आम नागरिक के पास क्या कानूनी अधिकार मौजूद हैं।

Legality of Retaining Dead Body over Unpaid Bills: Your Rights Against Hospital Detention Practices in India
दिल्ली हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक और सख्त फैसला - फोटो : Adobe stock

दिल्ली हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक और सख्त फैसला

  • दिल्ली उच्च न्यायालय ने 2016 के एक मामले की सुनवाई के दौरान साफ कहा था कि अस्पताल किसी मरीज की मौत के बाद बकाया बिल वसूलने के लिए शव को रोकने का अधिकार नहीं रखते।
  • अगर कोई अस्पताल ऐसा करता है, तो उसे बंधक बनाने के अपराध के तहत कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।
  • संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत किसी भी मृत व्यक्ति के शव को सम्मानजनक अंतिम संस्कार का पूरा अधिकार है, जिसे छीना नहीं जा सकता।
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पीड़ितों के लिए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की आधिकारिक गाइडलाइन - फोटो : Adobe Stock

पीड़ितों के लिए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की आधिकारिक गाइडलाइन

  • स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा जारी 'पेशेंट राइट्स चार्टर' में स्पष्ट रूप से लिखा है कि बिल बकाया होने पर भी शव नहीं रोका जा सकता।
  • अस्पताल को अपने पैसे वसूलने के लिए परिजनों पर दबाव बनाने या शव रोकने के बजाय सिविल कोर्ट के जरिए कानूनी प्रक्रिया अपनाने का अधिकार है।
  • अस्पताल प्रशासन मृत व्यक्ति के शव को तुरंत परिजनों को सौंपने के लिए कानूनी रूप से बाध्य है, वे इसे किसी भी शर्त पर रोक नहीं सकते।
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Legality of Retaining Dead Body over Unpaid Bills: Your Rights Against Hospital Detention Practices in India
अगर अस्पताल शव देने से मना करे, तो तुरंत क्या कदम उठाएं? - फोटो : Adobe Stock

अगर अस्पताल शव देने से मना करे, तो तुरंत क्या कदम उठाएं?

  • ऐसी स्थिति में तुरंत स्थानीय पुलिस को बुलाएं या नजदीकी थाने में जाकर अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ लिखित शिकायत दर्ज कराएं।
  • आप जिले के मुख्य चिकित्सा अधिकारी या राज्य मानवाधिकार आयोग में भी अस्पताल की इस मनमानी के खिलाफ शिकायत कर सकते हैं।
  • अगर पैसे की व्यवस्था तुरंत नहीं हो पा रही है, तो अस्पताल को बाद में भुगतान करने का एक लिखित पत्र देकर शव की मांग करें।
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अस्पताल के अधिकारों की सीमा - फोटो : अमर उजाला
अस्पताल के अधिकारों की सीमा
  • अस्पताल बकाया पैसे के लिए सिर्फ मृतक के कानूनी वारिसों को नोटिस भेज सकता है या अदालत में सिविल मुकदमा दायर कर सकता है।
  • अगर आप बिल चुकाने में असमर्थ हैं, तो अस्पताल के मेडिकल सोशल वर्कर से मिलें और आयुष्मान भारत या मुख्यमंत्री राहत कोष जैसी कल्याणकारी योजनाओं के तहत छूट की मांग करें।
  • भुगतान करने से पहले हमेशा अस्पताल से 'आइटमवाइज बिल' मांगें, ताकि आप देख सकें कि कहीं किसी जांच या दवा का फालतू चार्ज तो नहीं जोड़ा गया है।
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