{"_id":"6a1e45c8c88644d8f2059ba7","slug":"niti-aayog-report-punjab-tops-school-education-sector-2026-06-02","type":"story","status":"publish","title_hn":"नीति आयोग की रिपोर्ट: स्कूली शिक्षा के क्षेत्र में पंजाब अव्वल, सरकारी स्कूलों का प्रदर्शन शानदार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
नीति आयोग की रिपोर्ट: स्कूली शिक्षा के क्षेत्र में पंजाब अव्वल, सरकारी स्कूलों का प्रदर्शन शानदार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: Nivedita
Updated Tue, 02 Jun 2026 08:24 AM IST
विज्ञापन
सार
नीति आयोग की शिक्षा गुणवत्ता रिपोर्ट 2026 के ताजा आंकड़ों के अनुसार पंजाब ने स्कूली शिक्षा के क्षेत्र में केरल, महाराष्ट्र और दिल्ली जैसे राज्यों को पीछे छोड़ते हुए देश में पहला स्थान हासिल कर लिया है।
स्कूल
- फोटो : संवाद/फाइल
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
विस्तार
पंजाब बदल रहा है और इसकी सबसे बड़ी पहचान बन रही है शिक्षा।
कभी पंजाब के सरकारी स्कूलों की हालत देश में सबसे पिछड़े राज्यों में गिनी जाती थी। 2016-17 में पंजाब शिक्षा के क्षेत्र में 22वें स्थान पर था, 2018-19 में 26वें और 2020 में 27वें स्थान तक फिसल गया था। 2022 में पंजाब की जनता ने बदलाव का फैसला किया और आम आदमी पार्टी की सरकार को जिम्मेदारी सौंपी।
नीति आयोग की शिक्षा गुणवत्ता रिपोर्ट 2026 के ताजा आंकड़ों के अनुसार पंजाब ने स्कूली शिक्षा के क्षेत्र में केरल, महाराष्ट्र और दिल्ली जैसे राज्यों को पीछे छोड़ते हुए देश में पहला स्थान हासिल कर लिया है। रिपोर्ट बताती है कि तीसरी कक्षा के भाषा स्तर में पंजाब के बच्चों ने 82 प्रतिशत दक्षता हासिल की है, जबकि केरल 75 प्रतिशत पर रहा। गणित में पंजाब ने 78 प्रतिशत अंक प्राप्त किए, जबकि केरल 70 प्रतिशत पर रहा। नौवीं कक्षा के गणित में पंजाब का प्रदर्शन 52 प्रतिशत रहा, जबकि केरल केवल 45 प्रतिशत तक पहुंच पाया। ये आंकड़े साफ बताते हैं कि पंजाब के सरकारी स्कूलों में बच्चों की बुनियादी शिक्षा पहले से कहीं अधिक मजबूत हुई है।
आज पंजाब के 99.9 प्रतिशत सरकारी स्कूलों में बिजली उपलब्ध है। 99 प्रतिशत स्कूलों में चालू कंप्यूटर मौजूद हैं। 80 प्रतिशत से अधिक स्कूलों में स्मार्ट क्लासरूम बनाए जा चुके हैं। स्मार्ट क्लासरूम की उपलब्धता में पंजाब 80.1 प्रतिशत पर है जबकि हरियाणा 50.3 प्रतिशत पर है। इंटरनेट सुविधा के मामले में पंजाब 88.9 प्रतिशत पर है जबकि हरियाणा 78.9 प्रतिशत पर है। यह अंतर सिर्फ आंकड़ों का नहीं, बल्कि सोच और प्राथमिकताओं का अंतर है।
विज्ञापन
हरियाणा की साइबर सिटी गुरुग्राम के सरकारी स्कूलों का प्रदर्शन भी पंजाब के सबसे निचले पायदान वाले जिलों से बहुत पीछे है।
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान की अगुवाई में पंजाब ने शिक्षकों को फिनलैंड और सिंगापुर जैसे देशों में प्रशिक्षण के लिए भेजा ताकि पंजाब के बच्चे भी दुनिया के सर्वश्रेष्ठ शिक्षा मॉडल का लाभ उठा सकें। यही कारण है कि सरकारी स्कूलों के 786 छात्रों ने जेईई मेन और 1284 छात्रों ने नीट जैसी राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाएं पास की हैं।
राज्य सरकार 13 हजार से अधिक नए शिक्षकों और स्टाफ की भर्ती कर चुकी है। 3 लाख छात्रों के लिए इंग्लिश एज कार्यक्रम चलाया जा रहा है। राज्य में 118 अत्याधुनिक स्कूल ऑफ एमिनेंस स्थापित किए गए हैं पंजाब ने साबित कर दिया है कि जब सरकार की प्राथमिकता शिक्षा होती है तो कुछ ही वर्षों में इतिहास बदला जा सकता है। जो राज्य कभी देश में 27वें स्थान पर था, वही आज देश में नंबर-1 बनकर खड़ा है।
कभी पंजाब के सरकारी स्कूलों की हालत देश में सबसे पिछड़े राज्यों में गिनी जाती थी। 2016-17 में पंजाब शिक्षा के क्षेत्र में 22वें स्थान पर था, 2018-19 में 26वें और 2020 में 27वें स्थान तक फिसल गया था। 2022 में पंजाब की जनता ने बदलाव का फैसला किया और आम आदमी पार्टी की सरकार को जिम्मेदारी सौंपी।
नीति आयोग की शिक्षा गुणवत्ता रिपोर्ट 2026 के ताजा आंकड़ों के अनुसार पंजाब ने स्कूली शिक्षा के क्षेत्र में केरल, महाराष्ट्र और दिल्ली जैसे राज्यों को पीछे छोड़ते हुए देश में पहला स्थान हासिल कर लिया है। रिपोर्ट बताती है कि तीसरी कक्षा के भाषा स्तर में पंजाब के बच्चों ने 82 प्रतिशत दक्षता हासिल की है, जबकि केरल 75 प्रतिशत पर रहा। गणित में पंजाब ने 78 प्रतिशत अंक प्राप्त किए, जबकि केरल 70 प्रतिशत पर रहा। नौवीं कक्षा के गणित में पंजाब का प्रदर्शन 52 प्रतिशत रहा, जबकि केरल केवल 45 प्रतिशत तक पहुंच पाया। ये आंकड़े साफ बताते हैं कि पंजाब के सरकारी स्कूलों में बच्चों की बुनियादी शिक्षा पहले से कहीं अधिक मजबूत हुई है।
विज्ञापन
विज्ञापन
आज पंजाब के 99.9 प्रतिशत सरकारी स्कूलों में बिजली उपलब्ध है। 99 प्रतिशत स्कूलों में चालू कंप्यूटर मौजूद हैं। 80 प्रतिशत से अधिक स्कूलों में स्मार्ट क्लासरूम बनाए जा चुके हैं। स्मार्ट क्लासरूम की उपलब्धता में पंजाब 80.1 प्रतिशत पर है जबकि हरियाणा 50.3 प्रतिशत पर है। इंटरनेट सुविधा के मामले में पंजाब 88.9 प्रतिशत पर है जबकि हरियाणा 78.9 प्रतिशत पर है। यह अंतर सिर्फ आंकड़ों का नहीं, बल्कि सोच और प्राथमिकताओं का अंतर है।
Trending Videos
हरियाणा की साइबर सिटी गुरुग्राम के सरकारी स्कूलों का प्रदर्शन भी पंजाब के सबसे निचले पायदान वाले जिलों से बहुत पीछे है।
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान की अगुवाई में पंजाब ने शिक्षकों को फिनलैंड और सिंगापुर जैसे देशों में प्रशिक्षण के लिए भेजा ताकि पंजाब के बच्चे भी दुनिया के सर्वश्रेष्ठ शिक्षा मॉडल का लाभ उठा सकें। यही कारण है कि सरकारी स्कूलों के 786 छात्रों ने जेईई मेन और 1284 छात्रों ने नीट जैसी राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाएं पास की हैं।
राज्य सरकार 13 हजार से अधिक नए शिक्षकों और स्टाफ की भर्ती कर चुकी है। 3 लाख छात्रों के लिए इंग्लिश एज कार्यक्रम चलाया जा रहा है। राज्य में 118 अत्याधुनिक स्कूल ऑफ एमिनेंस स्थापित किए गए हैं पंजाब ने साबित कर दिया है कि जब सरकार की प्राथमिकता शिक्षा होती है तो कुछ ही वर्षों में इतिहास बदला जा सकता है। जो राज्य कभी देश में 27वें स्थान पर था, वही आज देश में नंबर-1 बनकर खड़ा है।