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संविदा पर संकट, सिस्टम पर सवाल: नौकरी जाने के डर से डिप्रेशन में आया नर्सिंगकर्मी; जहरीला पदार्थ खाने से मौत

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर Published by: हिमांशु सिंह Updated Fri, 12 Jun 2026 07:23 PM IST
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सार

जयपुर के महिला चिकित्सालय में कार्यरत संविदाकर्मी दीपक चरवाल की जहरीला पदार्थ सेवन करने के बाद मौत हो गई। परिजनों और सहकर्मियों का आरोप है कि नौकरी जाने की आशंका और संविदा कर्मचारियों को हटाने की कार्रवाई के कारण वह मानसिक तनाव में था।

Tragic Cost of Job Insecurity Depressed Contract Nurse Dies by Suicide Over Layoff Fears
बड़ी संख्या में नर्सिंगकर्मी और संविदा कर्मचारियों ने नारेबाजी की - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार

राजस्थान के सरकारी अस्पतालों में संविदा कर्मचारियों को कार्यमुक्त किए जाने की कार्रवाई के बीच एक दर्दनाक घटना सामने आई है। एसएमएस मेडिकल कॉलेज से संबद्ध महिला चिकित्सालय*में नर्सिंग स्टाफ के रूप में कार्यरत संविदाकर्मी दीपक चरवाल की जहरीला पदार्थ खाने से मौत हो गई। परिजनों और सहकर्मियों का आरोप है कि नौकरी जाने की आशंका और भविष्य को लेकर बढ़ती चिंता के कारण वह लंबे समय से तनाव में था।




जानकारी के अनुसार, महिला चिकित्सालय में हाल ही में करीब 150 संविदा कर्मचारियों को कार्यमुक्त किया गया था। इसके विरोध में कर्मचारियों ने बुधवार को प्रदर्शन भी किया। इसी बीच दीपक चरवाल अपने कमरे पर चला गया, जहां उसने कथित तौर पर विषाक्त पदार्थ का सेवन कर लिया।
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बेहोश हालत में मिला दीपक
कुछ देर बाद साथी कर्मचारी उसके कमरे पर पहुंचे तो दरवाजा नहीं खुला। दरवाजा तोड़कर अंदर देखा गया तो दीपक बेहोशी की हालत में मिला। उसे तत्काल एसएमएस अस्पताल ले जाया गया, जहां उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। घटना की सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में नर्सिंगकर्मी और संविदा कर्मचारी अस्पताल पहुंच गए। कर्मचारियों ने अस्पताल प्रशासन और सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए संविदा कर्मचारियों को हटाने के फैसले पर नाराजगी जताई।
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150 संविदा कर्मचारियों को हटाया जा चुका
नर्सिंग कर्मी जितेंद्र कटाराने बताया कि महिला चिकित्सालय से करीब 150 संविदा कर्मचारियों को हटाया जा चुका है, जबकि जेके लोन अस्पताल में भी लगभग 200 कर्मचारियों को हटाने के लिए नोटिस जारी किए गए हैं। उनका कहना है कि लगातार हो रही इस कार्रवाई से कर्मचारियों में भय और असुरक्षा का माहौल है। कर्मचारियों का आरोप है कि नौकरी छिनने की आशंका ने कई संविदाकर्मियों को मानसिक तनाव में डाल दिया है। दीपक की मौत के बाद कर्मचारियों ने संविदा कर्मियों को हटाने का निर्णय वापस लेने, रोजगार सुरक्षा सुनिश्चित करने और मृतक के परिजनों को आर्थिक सहायता देने की मांग की है।

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यह घटना एक बार फिर संविदा कर्मचारियों की नौकरी की अस्थिरता और उससे पैदा होने वाले मानसिक दबाव को लेकर सवाल खड़े कर रही है। फिलहाल मामले को लेकर अस्पताल प्रशासन और सरकार की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है।
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