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बारिश के पानी से भरे गड्ढे में डूबकर दो बच्चों की मौत
अमर उजाला/ ब्यूरो
Updated Sun, 07 Aug 2016 01:33 AM IST
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बारिश के पानी से भरे गड्ढे में डूबकर दो बच्चों की मौत
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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थाना गोंडा क्षेत्र के गांव हीरपुर के दो बच्चों की बाढ़ौन गांव के ईंट भट्ठे में खोदे गए एक गड्ढे में डूबकर मौत हो गई। बच्चों की मौत से दो परिवारों में कोहराम मच गया। ग्रामीणों ने बच्चों की जान बचाने के लिए खूब भागदौड़ की, किंतु बदहाल स्वास्थ्य सेवाएं इसमें आड़े आ गईं। ग्रामीण बच्चों को पहले गोंडा के सीएचसी ले गए लेकिन वहां कोई डॉक्टर नहीं मिला। बाद में जब वे बच्चों को इगलास के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे, लेकिन तब तक बच्चों की सांसें थम चुकी थीं।
गांव हीरपुर निवासी वीरपाल सिंह का पुत्र अंकित (10) और लाखन सिंह का पुत्र छिंगा (8) गांव के ही एक अन्य बच्चे के साथ जंगल में जामुन खाने के लिए घर से गए थे। जामुन खाते-खाते दोनों बच्चों ने गांव सेलगभग आधा किमी दूर ईंटों की पथाई के लिए खोदी गई मिट्टी के गहरे गड्ढे में भरे बारिश के पानी में नहाने को छलांग लगा दी। इनका साथी तीसरा बालक बाहर ही खड़ा रहा। नहाने के दौरान दोनों बच्चे जब डूबने लगे तो बाहर खड़ा बालक शोर मचाते हुए गांव पहुंचा और हादसे की सूचना दी। आनन-फानन ग्रामीण मौके पर पहुंचे और रस्सी के सहारे गड्ढे से दोनों बच्चों को निकाला। सूचना पर एसओ गोंडा सुभाषचन्द्र यादव मय पुलिस बल के मौके पर पहुंचे। पुलिस ने ग्रामीणों की मदद से गोंडा सीएचसी पहुंची, वहां पर कोई डॉक्टर नहीं मिला तो उनको इगलास सीएचसी में भर्ती कराया गया। जहां पर दोनों बच्चों को मृत घोषित कर दिया गया। मृत बच्चे मौसेरे भाई बताए जाते हैं। बच्चों की मौत पर ग्रामीणों ने आक्रोश जताया। ग्रामीणों का आरोप था कि भट्ठा मालिक ने किसकी अनुमति से इतना गहरा गड्ढा खोदा।
अस्पतालों में इमरजेंसी सेवा नहीं, डॉक्टर भी नदारत
सामुदायिक स्वास्थ्य गोंडा और इगलास दोनों ही स्थानों पर आपातकालीन व्यवस्था हैं। दोनों ही स्थानों पर इमरजेंसी के लिए डॉक्टरों का अभाव है। क्षेत्र के लोगों में इस बात को लेकर आक्रोश है कि आखिर स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी इतने बेखबर क्यों है कि उनके द्वारा पूरी तहसील में किसी भी अस्पताल में पर आपातकालीन व्यवस्था के लिए डॉक्टरों की तैनाती नहीं है। एसओ गोंडा सुभाष यादव का कहना था कि वे यहां पर इस कारण आए थे। यहां पर बच्चों के इलाज के लिए आपातकालीन व्यवस्था होगी, लेकिन यहां पर कोई डॉक्टर नहीं मिला। परिजनों के आने पर यह तय होगा कि शवों का पोस्टमार्टम कराया जाएगा या नहीं।
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गड्ढा खोदने की किससे ली परमीशन
भट्ठे के पास स्थित जिस गड्ढे में डूबकर बच्चों की मौत हुई, उससे ग्रामीणों में काफी रोष है। ग्रामीणों का कहना है कि पथाई के लिए दस फीट का गड्ढा भट्ठा मालिक ने कैसे खोदा। क्या इसकी परमीशन ली गई थी। अगर यह गहरा गड्ढा नहीं होता तो बच्चे इसमें नहीं डूबते। बच्चों को इस बात का अंदाजा नहीं था कि यह गड्ढा इतना गहरा है। ग्रामीणों ने भट्ठा मालिक पर भी कार्रवाई की मांग की है।
राजस्व टीम से आंकलन कराकर जिलाधिकारी को को रिपोर्ट प्रेषित कराई जाएगी, जिससे कि परिवार को आर्थिक सहायता दिलाई जा सके ।
सुभाषचन्द्र यादव, एसओ गोंडा
गांव हीरपुर निवासी वीरपाल सिंह का पुत्र अंकित (10) और लाखन सिंह का पुत्र छिंगा (8) गांव के ही एक अन्य बच्चे के साथ जंगल में जामुन खाने के लिए घर से गए थे। जामुन खाते-खाते दोनों बच्चों ने गांव सेलगभग आधा किमी दूर ईंटों की पथाई के लिए खोदी गई मिट्टी के गहरे गड्ढे में भरे बारिश के पानी में नहाने को छलांग लगा दी। इनका साथी तीसरा बालक बाहर ही खड़ा रहा। नहाने के दौरान दोनों बच्चे जब डूबने लगे तो बाहर खड़ा बालक शोर मचाते हुए गांव पहुंचा और हादसे की सूचना दी। आनन-फानन ग्रामीण मौके पर पहुंचे और रस्सी के सहारे गड्ढे से दोनों बच्चों को निकाला। सूचना पर एसओ गोंडा सुभाषचन्द्र यादव मय पुलिस बल के मौके पर पहुंचे। पुलिस ने ग्रामीणों की मदद से गोंडा सीएचसी पहुंची, वहां पर कोई डॉक्टर नहीं मिला तो उनको इगलास सीएचसी में भर्ती कराया गया। जहां पर दोनों बच्चों को मृत घोषित कर दिया गया। मृत बच्चे मौसेरे भाई बताए जाते हैं। बच्चों की मौत पर ग्रामीणों ने आक्रोश जताया। ग्रामीणों का आरोप था कि भट्ठा मालिक ने किसकी अनुमति से इतना गहरा गड्ढा खोदा।
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अस्पतालों में इमरजेंसी सेवा नहीं, डॉक्टर भी नदारत
सामुदायिक स्वास्थ्य गोंडा और इगलास दोनों ही स्थानों पर आपातकालीन व्यवस्था हैं। दोनों ही स्थानों पर इमरजेंसी के लिए डॉक्टरों का अभाव है। क्षेत्र के लोगों में इस बात को लेकर आक्रोश है कि आखिर स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी इतने बेखबर क्यों है कि उनके द्वारा पूरी तहसील में किसी भी अस्पताल में पर आपातकालीन व्यवस्था के लिए डॉक्टरों की तैनाती नहीं है। एसओ गोंडा सुभाष यादव का कहना था कि वे यहां पर इस कारण आए थे। यहां पर बच्चों के इलाज के लिए आपातकालीन व्यवस्था होगी, लेकिन यहां पर कोई डॉक्टर नहीं मिला। परिजनों के आने पर यह तय होगा कि शवों का पोस्टमार्टम कराया जाएगा या नहीं।
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भट्ठे के पास स्थित जिस गड्ढे में डूबकर बच्चों की मौत हुई, उससे ग्रामीणों में काफी रोष है। ग्रामीणों का कहना है कि पथाई के लिए दस फीट का गड्ढा भट्ठा मालिक ने कैसे खोदा। क्या इसकी परमीशन ली गई थी। अगर यह गहरा गड्ढा नहीं होता तो बच्चे इसमें नहीं डूबते। बच्चों को इस बात का अंदाजा नहीं था कि यह गड्ढा इतना गहरा है। ग्रामीणों ने भट्ठा मालिक पर भी कार्रवाई की मांग की है।
राजस्व टीम से आंकलन कराकर जिलाधिकारी को को रिपोर्ट प्रेषित कराई जाएगी, जिससे कि परिवार को आर्थिक सहायता दिलाई जा सके ।
सुभाषचन्द्र यादव, एसओ गोंडा