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Prayagraj : शंकरगढ़ का जल संकट- पानी का एक गड्ढा, जहां से इन्सान भी पीते हैं और कुत्ते भी

शशांक वर्मा, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Fri, 29 May 2026 02:16 PM IST
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सार

बारा तहसील की शंकरगढ़ नगर पंचायत में आप घूमिए और किसी से जीवन की समस्याएं पूछिए तो यही कहेगा, सिर्फ पानी चाहिए। यह रट आज की नहीं वर्षों पुरानी है।

Shankargarh water crisis A water hole where both humans and dogs drink
शंकरगढ़ में गड्ढे (चूहड़) से पानी भरते ओसा गांव के लोग। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार

बारा तहसील की शंकरगढ़ नगर पंचायत में आप घूमिए और किसी से जीवन की समस्याएं पूछिए तो यही कहेगा, सिर्फ पानी चाहिए। यह रट आज की नहीं वर्षों पुरानी है। संकट का चरम यह है कि ओसा ग्राम पंचायत के एक मजरे में पत्थरों के बीच एक गड्ढा है, जहां पहाड़ों से रिसकर पानी जमा होता है। बस्ती के लोग भी इसे पीते हैं और कुत्ते भी।



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तहसील मुख्यालय से भेलांव और तेलघना गांव होते हुए आगे बढ़ने पर करीब 14 किमी की दूरी पर ओसा गांव स्थित है। यहां के प्राथमिक विद्यालय के ठीक पीछे करीब पांच सौ मीटर दूरी पर ओसा पहाड़ी है। यहां एक मजदूरी पेशा लोगों की छोटी बस्ती है। बजुर्ग रामलाल बताते हैं कि हम सब को बेसहारों की तरह छोड़ दिया गया। उम्र बीती जा रही है, पानी की कोई व्यवस्था नहीं।
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चूहड़ का गंदा पानी पीते हैं लोग

वहां बने गड्ढे को दिखाते हुए उन्होंने बताया कि इसी चूहड़ (स्थानीय नाम) का गंदा पानी हम सब पीते हैं। कुत्ते भी यहीं अपनी प्यास बुझाते हैं। आखिर वे जाए कहां। दोपहर के समय कई महिला और पुरुष वहां पानी भर रहे थे। उनमें से एक घर की बहू सोनू सामने आई। बोली कि पानी के लिए सुबह से शाम तक हम कई चक्कर इस चूहड़ के लगाते हैं। पीछे से कई महिलाओं ने सुर भरा।

राजबहादुर और बल्ले ने बताया कि कई साल पहले एक बोर कराया गया था लेकिन काम न आया। ग्राम प्रधान गणेश कुमार भी समस्या को स्वीकारते हैं। पानी की यह समस्या सिर्फ एक गांव की नहीं, शंकरगढ़ के 76 गांवों की है। हालांकि, यह मानव जनित से ज्यादा भूसंरचना की देन है। क्योंकि यह क्षेत्र पथरीली पहाड़ियों का है। लोगों को दुख इस बात का है कि इनकी समस्या को दूर करने के लिए जो भी योजनाएं बनीं, उन्हें अमल में लाने के लिए कोई ठोस काम न हुआ।

कपड़े से छानकर पीते हैं पानी

राजेंद्र कहते हैं कि चूहड़ का पानी बहुत गंदा होता। इसे कपड़े से छानते हैं फिर भी साफ नहीं होता। बदबू भी आती है लेकिन प्यास बुझाना मजबूरी है। राजबहादुर ने बताया कि इसकी वजह से इस गांव के लोगों को पेट की समस्या होती है। दिन में करीब दस किमी दूर जाकर दिखाना पड़ता है।

जब सूख जाता है चूहड़...

बस्ती एक महिला, जिसे सभी बुआ कहते हैं। उन्होंने बताया कि ज्यादा गर्मी पड़ने पर चूहड़ में पानी सूख जाता है। तब कम से कम एक किलोमीटर दूर जाकर एक हैंडपंप से पानी लाना पड़ता है। जेठ की दोपहरी में ऊबड़-खाबड़ रास्ते से पैदल जाना पड़ता है। एक बार में ज्यादा से ज्यादा दो डिब्बा पानी ला पाते हैं। इसलिए कई चक्कर लगाने पड़ते हैं।

- सेंट्रल ग्राउंड वाटर बोर्ड (सीजीडब्ल्यूबी) की रिपोर्ट के अनुसार जब भूजल स्तर 40 मीटर से नीचे हो तो स्थिति गंभीर मानी जाती है।
- शंकरगढ़ क्षेत्र का भूजल स्तर 80 मीटर है। गर्मी में तो अधिकतर स्थानों पर करीब 100 मीटर से भी नीचे चला जाता है।
- सीजीडब्ल्यूबी के अनुसार शहरी क्षेत्र के एक व्यक्ति को प्रतिदिन 135 लीटर पानी चाहिए और ग्रामीण व्यक्ति को 55 लीटर।
- शंकरगढ़ में कई गांव ऐसे हैं, अनुमानत: जहां पूरे परिवार को 55 से 70 लीटर पानी मिल पाता है। वह भी उनकी मेहनत से।

एक नजर

शंकरगढ़ के 12 वार्डों की जनसंख्या लगभग 25000
ओसा ग्राम पंचायत की आबादी 2400
गांव में 20 हैंडपंप, तीन खराब हैं
कुछ लोगों ने निजी व्यवस्था की है

नगर में 25 सरकारी समरसेबल पंप लगे हैं। 20 टैंकर से पानी सप्लाई की व्यवस्था है। जरूरत पड़ने पर अतरिक्त टैंकर भेजा जाता है। - पार्वती कोटार्य, शंकरगढ़ नगर पंचायत अध्यक्ष

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