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Banda News: बंदी की इलाज के दौरान लखनऊ में मौत
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बांदा। रिहाई के दिन कोमा की हालत में अस्पताल पहुंचाए गए विचाराधीन बंदी की इलाज के दौरान केजीएमयू लखनऊ में मौत हो गई। उसके साथ लखनऊ में परिजन भी मौजूद रहे। वहीं उसका पोस्टमार्टम कराया जा रहा है। उधर सूत्रों के अनुसार, मंडल कारागार में लगे सीसीटीवी कैमरों की जांच में बंदी के नहाते समय गिरने का सीसीटीवी फुटेज भी मिला है। इससे अंदाजा लगाया जा रहा है कि गिरने से सिर में चोट लगने से वह कोमा में चला गया था।
बबेरू कोतवाली क्षेत्र के मुरवल गांव निवासी नीतीश दुष्कर्म व पाक्सो एक्ट के मामले में नौ अक्तूबर 2025 से मंडल कारागार में निरुद्ध था। उसे न्यायालय से जमानत मिल चुकी थी। सोमवार को उसकी रिहाई होनी थी। इसी दौरान उसकी हालत बिगड़ गई जिससे वह कोमा में चला गया था। जेल पुलिस ने पहले उसे जिला अस्पताल बांदा उसके बाद रानी दुर्गावती मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया था। वहां भी उसकी स्थिति में सुधार नहीं हुआ था। डॉक्टरों की सलाह पर उसे मंगलवार की शाम चार बजे लखनऊ स्थित किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी के लिए रेफर किया था। उसके साथ उसके चाचा शिरोमन भी गए थे। वहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
मामले में अधिवक्ता रोहित सिंह गौतम ने आरोप लगाया था कि उसके मुवक्किल के साथ मारपीट की गई तथा जेल कर्मियों ने मेडिकल कॉलेज में नीतीश की मां लीलावती से जबरन अंगूठा लगवाकर सुपुर्दगी कराई गई। अधिवक्ता का आरोप था कि जेल कर्मी राकेश गौड़ व आशीष पांडेय उसे अस्पताल में छोड़कर वापस जेल चले गए थे। इस पर अधिवक्ता ने उसके परिजनों के साथ जिला जज अल्पना, जिलाधिकारी अमित आसेरी और पुलिस अधीक्षक पलाश बंसल को प्रार्थना पत्र देकर जेल प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कार्रवाई की मांग की थी। जिस पर जिला जज के निर्देश पर तीन सदस्यीय टीम गठित की गई थी। टीम में एसीजेएम प्रथम सौम्या गिरी, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव सौरभ सिंह, किशोर न्याय बोर्ड के न्यायिक अधिकारी शिव शक्ति हर्षवर्धन को शामिल किया था। टीम ने मंगलवार को दोपहर करीब 12 बजे कारागार पहुंचकर जांच की थी।
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न्यायिक अधिकारियों जेल में आकर जांच की थी। जांच में सीसीटीवी में बंदी के नहाने के दौरान फिसलकर गिरने के फुटेज मिले हैं। उसकी मृत्यु की जानकारी हुई है। शव का पोस्टमार्टम केजीएमयू में कराया जा रहा है। गिरने से सिर में चोट लगने से कोमा में जाने की संभावना है। जेल से बंदी की रिहाई भी की जा चुकी थी। -शशिकांत सिंह, जेल अधीक्षक, बांदा
किशोर न्यायालय स्थानांतरित किया गया था मामला
दुष्कर्म व पाक्सो एक्ट में निरुद्ध चल रहे बंदी नीतीश के अधिवक्ता रोहित सिंह ने बताया कि हाईस्कूल प्रमाणपत्र के अनुसार नीतीश पाल की जन्मतिथि चार मई 2007 होने से घटना के समय उसकी आयु 16 वर्ष, छह माह, 13 दिन थी। इसके आधार पर 24 अप्रैल 2026 को विशेष न्यायाधीश पाक्सो कोर्ट ने उसे किशोर घोषित करते हुए मामला किशोर न्याय बोर्ड स्थानांतरित कर दिया था। किशोर न्याय बोर्ड से जमानत अर्जी निरस्त होने के बाद अपील दायर की गई। जिस पर अपर सत्र न्यायाधीश ने 22 मई 2026 को जमानत मंजूर कर ली थी। इसके बाद जमानत संबंधी औपचारिकताएं पूरी होने पर 30 मई को रिहाई परवाना जिला कारागार भेजा गया था। लेकिन आदेश में थाना का नाम गलत अंकित होने के कारण उसकी रिहाई नहीं हो सकी थी।
बबेरू कोतवाली क्षेत्र के मुरवल गांव निवासी नीतीश दुष्कर्म व पाक्सो एक्ट के मामले में नौ अक्तूबर 2025 से मंडल कारागार में निरुद्ध था। उसे न्यायालय से जमानत मिल चुकी थी। सोमवार को उसकी रिहाई होनी थी। इसी दौरान उसकी हालत बिगड़ गई जिससे वह कोमा में चला गया था। जेल पुलिस ने पहले उसे जिला अस्पताल बांदा उसके बाद रानी दुर्गावती मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया था। वहां भी उसकी स्थिति में सुधार नहीं हुआ था। डॉक्टरों की सलाह पर उसे मंगलवार की शाम चार बजे लखनऊ स्थित किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी के लिए रेफर किया था। उसके साथ उसके चाचा शिरोमन भी गए थे। वहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
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मामले में अधिवक्ता रोहित सिंह गौतम ने आरोप लगाया था कि उसके मुवक्किल के साथ मारपीट की गई तथा जेल कर्मियों ने मेडिकल कॉलेज में नीतीश की मां लीलावती से जबरन अंगूठा लगवाकर सुपुर्दगी कराई गई। अधिवक्ता का आरोप था कि जेल कर्मी राकेश गौड़ व आशीष पांडेय उसे अस्पताल में छोड़कर वापस जेल चले गए थे। इस पर अधिवक्ता ने उसके परिजनों के साथ जिला जज अल्पना, जिलाधिकारी अमित आसेरी और पुलिस अधीक्षक पलाश बंसल को प्रार्थना पत्र देकर जेल प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कार्रवाई की मांग की थी। जिस पर जिला जज के निर्देश पर तीन सदस्यीय टीम गठित की गई थी। टीम में एसीजेएम प्रथम सौम्या गिरी, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव सौरभ सिंह, किशोर न्याय बोर्ड के न्यायिक अधिकारी शिव शक्ति हर्षवर्धन को शामिल किया था। टीम ने मंगलवार को दोपहर करीब 12 बजे कारागार पहुंचकर जांच की थी।
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किशोर न्यायालय स्थानांतरित किया गया था मामला
दुष्कर्म व पाक्सो एक्ट में निरुद्ध चल रहे बंदी नीतीश के अधिवक्ता रोहित सिंह ने बताया कि हाईस्कूल प्रमाणपत्र के अनुसार नीतीश पाल की जन्मतिथि चार मई 2007 होने से घटना के समय उसकी आयु 16 वर्ष, छह माह, 13 दिन थी। इसके आधार पर 24 अप्रैल 2026 को विशेष न्यायाधीश पाक्सो कोर्ट ने उसे किशोर घोषित करते हुए मामला किशोर न्याय बोर्ड स्थानांतरित कर दिया था। किशोर न्याय बोर्ड से जमानत अर्जी निरस्त होने के बाद अपील दायर की गई। जिस पर अपर सत्र न्यायाधीश ने 22 मई 2026 को जमानत मंजूर कर ली थी। इसके बाद जमानत संबंधी औपचारिकताएं पूरी होने पर 30 मई को रिहाई परवाना जिला कारागार भेजा गया था। लेकिन आदेश में थाना का नाम गलत अंकित होने के कारण उसकी रिहाई नहीं हो सकी थी।