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Mainpuri News: 25 लाख की आबादी पर 19 यूनिट रक्त, गर्मी में कैसे बचेगा जीवन
संवाद न्यूज एजेंसी, मैनपुरी
Updated Mon, 01 Jun 2026 11:52 PM IST
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मैनपुरी। वर्तमान समय में गर्मी के कारण एनीमिया के मरीजों की संख्या बढ़ी है। जिला अस्पताल की ब्लड बैंक में खून का संकट खड़ा हो गया है। 25 लाख से अधिक की आबादी वाले जिले की सरकारी ब्लड बैंक में मात्र 19 यूनिट ब्लड ही उपलब्ध है। यदि कोई बड़ा संकट खड़ा होता है तो जिले के लोगों के लिए खून उपलब्ध कराना मुश्किल हो जाएगा। ऐसे में डॉक्टरों ने जिले के लोगों को गर्मी के मौसम में सेहत का विशेष ख्याल रखने की सलाह दी है।
जिले की करीब 25 लाख से अधिक की आबादी है। सरकारी ब्लड बैंक की बात करें तो सिर्फ जिला अस्पताल में ही एक ब्लड बैंक है। इसके अलावा दो निजी ब्लड बैंक भी हैं। हालांकि लोग सरकारी अस्पताल की ब्लड बैंक से ही ब्लड लेना पसंद करते हैं। सरकारी अस्पताल की ब्लड बैंक में इस समय मात्र 19 यूनिट ब्लड उपलब्ध है। पूर्व में केवल निगेटिव ग्रुप में ही ब्लड की दिक्कत थी लेकिन अब पॉजिटिव ग्रुप में भी ब्लड का संकट देखा जा रहा है। ओ पॉजिटिव, ए निगेटिव, एबी पॉजिटिव और निगेटिव में मात्र एक-एक यूनिट ब्लड ही शेष है।
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अप्रैल और मई में 455 मरीजों में हुई खून की कमी
स्वास्थ्य विभाग में दर्ज रिकॉर्ड के अनुसार पिछले दो महीने में खून की कमी के मरीज बढ़े हैं। जिला अस्पताल में दर्ज रिकॉर्ड के अनुसार अप्रैल में जिला अस्पताल पहुंचे 211 मरीजों को एनीमिया के कारण खून की जरूरत पड़ी। जबकि मई में 244 मरीजों को एनीमिया की दिक्कत होने पर खून की जरूरत पड़ी। यही हाल रहा तो जून में यह संख्या और भी बढ़ सकती है।
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थैलेसीमिया और डायलिसिस के मरीज खड़ा कर रहे संकट
जिले में थैलेसीमिया और डायलिसिस के मरीज तेजी के साथ बढ़ रहे हैं जो ब्लड बैंक के लिए संकट बने हुए हैं। जिले में वर्तमान में 41 थैलेसीमिया के मरीज हैं जिन्हें महीने में दो बार ब्लड देना पड़ता है। इनके तीमारदारों से बदले में ब्लड नहीं लिया जाता है। डायलिसिस और प्लास्टिक एनीमिया के मरीजों की बढ़ती संख्या भी ब्लड बैंक की चिंता बढ़ा रही है।
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कितना ब्लड है उपलब्ध
ए पाॅजिटिव- 7
ए निगेटिव- 1
बी पॉजिटव- 4
बी निगेटिव - 2
एबी पॉजिटिव- 1
एबी निगेटिव- 1
ओ पॉजिटिव- 1
ओ निगेटिव- 2
कुल- 19 यूनिट
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खून की कमी से बचना है तो इन बातों का रखें ख्याल
जिला अस्पताल के वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. जेजे राम का कहना है कि खून की कमी से बचने के लिए अपने खानपान पर विशेष ध्यान दें। आयरन युक्त आहार जैसे हरी पत्तेदार सब्जियां, सूखे मेवे, मांस, अंडे, और अनाज खाएं। साथ ही विटामिन सी से भरपूर आहार जैसे संतरा, नींबू, और स्ट्रॉबेरी का सेवन करें जो आयरन के अवशोषण में मदद करते हैं। तेज धूप में जाने से बचें। धूप में अधिक समय तक काम न करें। जरा भी कमजोरी होने पर खून की जांच अवश्य कराएं।
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रक्तदान दुनिया का सबसे बड़ा दान है। कोई भी स्वस्थ व्यक्ति जिला अस्पताल पहुंचकर रक्तदान कर किसी का जीवन बचा सकता है। रक्तदान करने से शरीर में किसी प्रकार की कमी नहीं होती है। -डॉ. विकास यादव, प्रभारी, ब्लड बैंक जिला अस्पताल
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अमर उजाला की ओर से 14 जून को लगाया जाएगा रक्तदान शिविर
14 जून को अमर उजाला की ओर से जिला अस्पताल में रक्तदान शिविर का आयोजन किया जाएगा। जिलाधिकारी डॉ. इंद्रमणि त्रिपाठी और एसपी गणेश प्रसाद साहा ने लोगों से अपील की है कि इस शिविर में बड़ी संख्या में लोग भाग लें। पुलिस और प्रशासन के लोग भी इस महादान शिविर में अपना योगदान देंगे। ताकि रक्त के अभाव में किसी भी मरीज की जान न जाए।
जिले की करीब 25 लाख से अधिक की आबादी है। सरकारी ब्लड बैंक की बात करें तो सिर्फ जिला अस्पताल में ही एक ब्लड बैंक है। इसके अलावा दो निजी ब्लड बैंक भी हैं। हालांकि लोग सरकारी अस्पताल की ब्लड बैंक से ही ब्लड लेना पसंद करते हैं। सरकारी अस्पताल की ब्लड बैंक में इस समय मात्र 19 यूनिट ब्लड उपलब्ध है। पूर्व में केवल निगेटिव ग्रुप में ही ब्लड की दिक्कत थी लेकिन अब पॉजिटिव ग्रुप में भी ब्लड का संकट देखा जा रहा है। ओ पॉजिटिव, ए निगेटिव, एबी पॉजिटिव और निगेटिव में मात्र एक-एक यूनिट ब्लड ही शेष है।
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अप्रैल और मई में 455 मरीजों में हुई खून की कमी
स्वास्थ्य विभाग में दर्ज रिकॉर्ड के अनुसार पिछले दो महीने में खून की कमी के मरीज बढ़े हैं। जिला अस्पताल में दर्ज रिकॉर्ड के अनुसार अप्रैल में जिला अस्पताल पहुंचे 211 मरीजों को एनीमिया के कारण खून की जरूरत पड़ी। जबकि मई में 244 मरीजों को एनीमिया की दिक्कत होने पर खून की जरूरत पड़ी। यही हाल रहा तो जून में यह संख्या और भी बढ़ सकती है।
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थैलेसीमिया और डायलिसिस के मरीज खड़ा कर रहे संकट
जिले में थैलेसीमिया और डायलिसिस के मरीज तेजी के साथ बढ़ रहे हैं जो ब्लड बैंक के लिए संकट बने हुए हैं। जिले में वर्तमान में 41 थैलेसीमिया के मरीज हैं जिन्हें महीने में दो बार ब्लड देना पड़ता है। इनके तीमारदारों से बदले में ब्लड नहीं लिया जाता है। डायलिसिस और प्लास्टिक एनीमिया के मरीजों की बढ़ती संख्या भी ब्लड बैंक की चिंता बढ़ा रही है।
कितना ब्लड है उपलब्ध
ए पाॅजिटिव- 7
ए निगेटिव- 1
बी पॉजिटव- 4
बी निगेटिव - 2
एबी पॉजिटिव- 1
एबी निगेटिव- 1
ओ पॉजिटिव- 1
ओ निगेटिव- 2
कुल- 19 यूनिट
खून की कमी से बचना है तो इन बातों का रखें ख्याल
जिला अस्पताल के वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. जेजे राम का कहना है कि खून की कमी से बचने के लिए अपने खानपान पर विशेष ध्यान दें। आयरन युक्त आहार जैसे हरी पत्तेदार सब्जियां, सूखे मेवे, मांस, अंडे, और अनाज खाएं। साथ ही विटामिन सी से भरपूर आहार जैसे संतरा, नींबू, और स्ट्रॉबेरी का सेवन करें जो आयरन के अवशोषण में मदद करते हैं। तेज धूप में जाने से बचें। धूप में अधिक समय तक काम न करें। जरा भी कमजोरी होने पर खून की जांच अवश्य कराएं।
रक्तदान दुनिया का सबसे बड़ा दान है। कोई भी स्वस्थ व्यक्ति जिला अस्पताल पहुंचकर रक्तदान कर किसी का जीवन बचा सकता है। रक्तदान करने से शरीर में किसी प्रकार की कमी नहीं होती है। -डॉ. विकास यादव, प्रभारी, ब्लड बैंक जिला अस्पताल
अमर उजाला की ओर से 14 जून को लगाया जाएगा रक्तदान शिविर
14 जून को अमर उजाला की ओर से जिला अस्पताल में रक्तदान शिविर का आयोजन किया जाएगा। जिलाधिकारी डॉ. इंद्रमणि त्रिपाठी और एसपी गणेश प्रसाद साहा ने लोगों से अपील की है कि इस शिविर में बड़ी संख्या में लोग भाग लें। पुलिस और प्रशासन के लोग भी इस महादान शिविर में अपना योगदान देंगे। ताकि रक्त के अभाव में किसी भी मरीज की जान न जाए।