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Mau News: वाहन महिलाओं के नाम पर ड्राइविंग सीट पुरुषों के हवाले
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बदलते सामाजिक परिवेश के बीच सड़कों पर दोपहिया और चारपहिया महिला वाहन चालकों की संख्या में वृद्धि हुई है। इनके नाम पर हर साल वाहन भी खरीदे जा रहे हैं।
इसके बावजूद ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने के मामले में महिलाएं अभी भी पीछे हैं। 14 महीनों में लगभग 29 हजार वाहन पंजीकृत हुए। इनमें करीब 9 हजार वाहन महिलाओं के नाम थे लेकिन ड्राइविंग लाइसेंस सिर्फ 860 महिलाओं के नाम पर बने।
14 महीनों में वाहन का मालिकाना हक महिलाओं को 32% मिला जबकि ड्राइविंग लाइसेंस(डीएल) केवल 4% महिलाओं का बना।
एआरटीओ कार्यालय के आंकड़ों के अनुसार इस साल के अप्रैल से मई तक केवल 99 महिलाओं के ही ड्राइविंग लाइसेंस जारी किए गए हैं, जबकि 3424 पुरुषों के लाइसेंस जारी हुए हैं।
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वहीं अप्रैल 2025 से मार्च 2026 तक कुल 18,370 लाइसेंस जारी हुए थे, जिनमें सिर्फ 761 लाइसेंस महिलाओं के नाम रहे। अप्रैल 2025 से मार्च 2026 तक 25023 वाहन पंजीकृत हुए इनमें महिलाओं के नाम 7823 थे। इस साल अप्रैल से मई तक 3792 वाहन पंजीकृत हुए इनमें महिलाओं के नाम 1323 वाहन हैं।
यह आंकड़े बताते हैं कि वाहन चलाने में सक्रिय भागीदारी के बावजूद लाइसेंस बनवाने के प्रति महिलाओं में जागरूकता या पहल अपेक्षाकृत कम है। महिलाओं के लाइसेंस बनवाने में पीछे रहने के कई कारण हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता की कमी, परिवार की प्राथमिकताएं, लाइसेंस प्रक्रिया को लेकर झिझक और समय की कमी प्रमुख वजहें हैं। कई महिलाएं घर या आस-पास के सीमित दायरे में ही वाहन चलाती हैं, इसलिए वे लाइसेंस बनवाने को जरूरी नहीं समझतीं।
इनसेट
पांच हजार का है जुर्माना
बगैर लाइसेंस के वाहन चलाने पर अधिकतम पांच हजार रुपये का जुर्माना है। इतना ही नहीं, यदि चालक के पास डीएल नहीं है तो दुर्घटना होने की स्थिति में बीमा क्लेम नहीं मिलता। चौकाने वाली बात है कि दोपहिया वाहनों का सबसे अधिक प्रयोग छात्राएं करती हैं, लेकिन लाइसेंस बनवाने में वे भी जागरूक नहीं दिखतीं।
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कोट-- --
पुरुषों की तुलना में अब भी महिलाएं लाइसेंस बनवाने में पीछे हैं। हालांकि बीते वर्षों की तुलना में 50 प्रतिशत से अधिक संख्या बढ़ी है। वर्ष 2022 में केवल 309 महिलाओं के लाइसेंस बने थे, जबकि 2025 में 761 लाइसेंस जारी किए गए हैं। -सुहेल अहमद, एआरटीओ, मऊ
इसके बावजूद ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने के मामले में महिलाएं अभी भी पीछे हैं। 14 महीनों में लगभग 29 हजार वाहन पंजीकृत हुए। इनमें करीब 9 हजार वाहन महिलाओं के नाम थे लेकिन ड्राइविंग लाइसेंस सिर्फ 860 महिलाओं के नाम पर बने।
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14 महीनों में वाहन का मालिकाना हक महिलाओं को 32% मिला जबकि ड्राइविंग लाइसेंस(डीएल) केवल 4% महिलाओं का बना।
एआरटीओ कार्यालय के आंकड़ों के अनुसार इस साल के अप्रैल से मई तक केवल 99 महिलाओं के ही ड्राइविंग लाइसेंस जारी किए गए हैं, जबकि 3424 पुरुषों के लाइसेंस जारी हुए हैं।
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वहीं अप्रैल 2025 से मार्च 2026 तक कुल 18,370 लाइसेंस जारी हुए थे, जिनमें सिर्फ 761 लाइसेंस महिलाओं के नाम रहे। अप्रैल 2025 से मार्च 2026 तक 25023 वाहन पंजीकृत हुए इनमें महिलाओं के नाम 7823 थे। इस साल अप्रैल से मई तक 3792 वाहन पंजीकृत हुए इनमें महिलाओं के नाम 1323 वाहन हैं।
यह आंकड़े बताते हैं कि वाहन चलाने में सक्रिय भागीदारी के बावजूद लाइसेंस बनवाने के प्रति महिलाओं में जागरूकता या पहल अपेक्षाकृत कम है। महिलाओं के लाइसेंस बनवाने में पीछे रहने के कई कारण हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता की कमी, परिवार की प्राथमिकताएं, लाइसेंस प्रक्रिया को लेकर झिझक और समय की कमी प्रमुख वजहें हैं। कई महिलाएं घर या आस-पास के सीमित दायरे में ही वाहन चलाती हैं, इसलिए वे लाइसेंस बनवाने को जरूरी नहीं समझतीं।
इनसेट
पांच हजार का है जुर्माना
बगैर लाइसेंस के वाहन चलाने पर अधिकतम पांच हजार रुपये का जुर्माना है। इतना ही नहीं, यदि चालक के पास डीएल नहीं है तो दुर्घटना होने की स्थिति में बीमा क्लेम नहीं मिलता। चौकाने वाली बात है कि दोपहिया वाहनों का सबसे अधिक प्रयोग छात्राएं करती हैं, लेकिन लाइसेंस बनवाने में वे भी जागरूक नहीं दिखतीं।
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कोट
पुरुषों की तुलना में अब भी महिलाएं लाइसेंस बनवाने में पीछे हैं। हालांकि बीते वर्षों की तुलना में 50 प्रतिशत से अधिक संख्या बढ़ी है। वर्ष 2022 में केवल 309 महिलाओं के लाइसेंस बने थे, जबकि 2025 में 761 लाइसेंस जारी किए गए हैं। -सुहेल अहमद, एआरटीओ, मऊ