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Siddharthnagar News: अस्पताल हैं, लेबर रूम भी पर स्त्री रोग विशेषज्ञ नहीं

Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Tue, 02 Jun 2026 02:03 AM IST
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There are hospitals, labour rooms too but no gynecologists
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सिद्धार्थनगर। सुरक्षित मातृत्व और संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने गांव-गांव स्वास्थ्य केंद्र, लेबर रूम और प्रसव सुविधाएं विकसित की हैं, लेकिन जिले में इन सुविधाओं की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी डॉक्टर ही गायब है। जिले के अधिकांश सामुदायिक और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर स्त्री और प्रसूती रोग विशेषज्ञ ही नहीं हैं। ऐसे में सामान्य प्रसव तो किसी तरह हो रहे हैं, लेकिन जटिल मामलों में गर्भवतियों को जिला अस्पताल, मेडिकल कॉलेज या निजी अस्पतालों की शरण लेनी पड़ रही है।

जिले के 16 प्रमुख सीएचसी और पीएचसी में से केवल आठ केंद्रों पर ही महिला चिकित्सक या प्रसूति रोग विशेषज्ञ तैनात हैं। बर्डपुर, बेवा, लोटन और उसका बाजार सीएचसी तथा नौगढ़ व बढ़नी पीएचसी को छोड़ दें तो अधिकांश अस्पताल विशेषज्ञ डॉक्टरों के बिना संचालित हो रहे हैं। स्वास्थ्य केंद्रों पर लेबर रूम बने हैं, प्रसव कक्ष तैयार हैं और संस्थागत प्रसव बढ़ाने के लिए आशा व एएनएम की पूरी व्यवस्था मौजूद है लेकिन सीजेरियन, अत्यधिक रक्तस्राव, उच्च जोखिम वाली गर्भावस्था, समयपूर्व प्रसव या अन्य जटिल परिस्थितियों में मरीजों को तत्काल रेफर करना पड़ता है। कई ब्लॉकों में तो वर्षों से स्त्री रोग विशेषज्ञ का पद खाली है। खुनियांव ब्लॉक में एक भी स्त्री रोग विशेषज्ञ नहीं है। यहां हर माह औसतन 15 गर्भवतियों को सिजेरियन की आवश्यकता होने पर जिला अस्पताल भेजा जाता है। इटवा ब्लॉक में भी सीएचसी और पीएचसी स्तर पर कोई स्त्री रोग विशेषज्ञ नहीं है और विशेष परिस्थितियों में हर माह लगभग 10 गर्भवतियों को रेफर किया जाता है। बांसी तहसील के 19 प्रसव केंद्रों में चार स्वीकृत पद होने के बावजूद एक भी स्त्री रोग विशेषज्ञ नहीं है। इसके बावजूद यहां हर माह करीब 675 प्रसव हो रहे हैं। डुमरियागंज क्षेत्र की 3.76 लाख महिलाओं के स्वास्थ्य की जिम्मेदारी एकमात्र महिला रोग विशेषज्ञ पर है, जो वर्तमान में अवकाश पर हैं।
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नेपाल सीमा से सटे बढ़नी पीएचसी में पिछले करीब 10 वर्षों से स्त्री रोग विशेषज्ञ नहीं हैं। यहां न सामान्य सिजेरियन सुविधा है और न ही एनेस्थीसिया या बाल रोग विशेषज्ञ की उपलब्धता। गंभीर मरीजों को 50 किलोमीटर दूर जिला मुख्यालय भेजना पड़ता है।
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स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी सुरक्षित मातृत्व अभियान के सामने बड़ी चुनौती है। जब तक ग्रामीण अस्पतालों में विशेषज्ञों की नियमित तैनाती नहीं होगी, तब तक लेबर रूम और अस्पताल भवन मातृत्व सुरक्षा की गारंटी नहीं बन पाएंगे।
ग्रामीण क्षेत्रों में कुछ स्थानों पर स्त्री रोग विशेषज्ञों के पद रिक्त हैं, लेकिन मातृ और शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को प्रभावित नहीं होने दिया जा रहा है। सभी सीएचसी-पीएचसी पर संस्थागत प्रसव की व्यवस्था है। जटिल मामलों को जिला अस्पताल और मेडिकल कॉलेज रेफर किया जाता है। विशेषज्ञ चिकित्सकों की तैनाती शासन स्तर का विषय है और रिक्त पदों की सूचना नियमित रूप से भेजी जाती है।
- डॉ. आरके चौरसिया, सीएमओ
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