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फौजी के अंतिम दर्शन को उमड़े लोग
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रामपुर मथुरा में सैनिक सम्मान के साथ आखिरी सलामी देते सेना के जवान। - संवाद
- फोटो : SITAPUR
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रामपुर मथुरा (सीतापुर)। चौका नदी के नाले में कार गिरने से शनिवार देर रात उसमें सवार फौजी की मौत हो गई थी। सोमवार को नम आंखों से सभी ने अंतिम विदाई दी। तिरंगे में लपेटकर शव को अंतिम संस्कार के लिए गांव के बाहर ले जाया गया। सैनिक के अंतिम दर्शन को लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा। पूरे सैन्य सम्मान व शस्त्र सलामी के साथ अंतिम संस्कार किया गया।
रामपुर मथुरा इलाके के भोगीपुर निवासी रंजीत (25) फौजी था। वह झारखंड प्रदेश के रामगढ़ जिले में सेना के राजपूत रेजीमेंट में एएमपी के पद पर तैनात थे। चार दिसंबर को छोटे भाई बलजीत की शादी में शामिल होने के लिए घर आया था। शनिवार की देर रात वह अपने साथी सिरकुंडा निवासी सतीश वर्मा (26), रामपुर मथुरा इलाके के ही दुलमपुरवा मजरा मरौंचा निवासी रवी चौहान के साथ कार में सवार होकर घर से गोड़ैचा गए थे, जहां से घर लौटते समय बांसुरा स्थित पंचपीर मजार के पास मोड़ पर कार अनियंत्रित होकर गहरे नाले में चली गई थी।
इस हादसे में कार सवार फौजी समेत तीनों लोगों की मौत हो गई थी। रविवार को पोस्टमार्टम के बाद तीनों दोस्तों के शव घर पहुंचे। सोमवार को फौजी के पार्थिव शरीर के अंतिम संस्कार के लिए तैयारी की गई। शरीर को तिरंगे में लपेटा गया। राजपूत रेजीमेंट झारखंड के सीओ वीरेंद्र सिंह, टुकड़ी के ग्रुप कमांडर शौरभ कुमार समेत 12 सैनिकों के साथ फौजी रंजीत के घर पहुंचे।
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वहीं, सूचना मिलने पर सेवता के पूर्व सपा विधायक महेंद्र सिंह झीन बाबू भी मौके पर पहुंचे और फौजी के पार्थिव शरीर पर पुष्प चक्र चढ़ाकर भावुक पलों में भावभीनी श्रद्घांजलि दी। इसके बाद पूरी तैयारी के बाद शव को गांव के बाहर ले जाया गया, जहां पर दोपहर बाद तीन बजे परे सैन्य सम्मान और शस्त्र सलामी के साथ अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान मौजूद लोगों की आंखें भर आईं। नम आंखों और गमगीन माहौल में फौजी को अंतिम दी गई। अंतिम संस्कार के दौरान गांव समेत आसपास क्षेत्र के काफी संख्या में लोग मौजूद रहे।
हर दिल अजीज थे रंजीत
हादसे में जान गंवाने वाले फौजी रंजीत स्वभाव से मिलनसार और हरदिल अजीज थे। दोस्ती निभाने में भी वह पीछे नहीं थे। तभी तो परिचित की शादी में शामिल होने के लिए उन्होंने छुट्टी बढ़वा ली थी, लेकिन उन्हें क्या पता था कि शनिवार की रात उनकी आखिरी रात होगी। वह संडे का सूरज नहीं देख पाएंगे। भले ही किसी ने इसकी कल्पना न की हो, लेकिन जो हुआ उसने हर किसी को झकझोर दिया। अंतिम संस्कार के दौरान इस तरह की चर्चाएं लोगों की जुबां पर होती रहीं।
फफक कर रोया परिवार
तिरंगे में लिपटा रंजीत का पार्थिव शरीर को जैसे ही अंतिम संस्कार के लिए ले जाने के लिए उठाया गया, वैसे ही फौजी की पत्नी, भाई, मां, बाप समेत पूरा परिवार, रिश्तेदार शव से लिपट पड़े। जोर-जोर से दहाड़े मारकर रोने लगे। मार्मिक मंजर देखकर मौजूद हर किसी का कलेजा कांप उठा। काफी प्रयास के बाद सभी को संभाला गया।
रामपुर मथुरा इलाके के भोगीपुर निवासी रंजीत (25) फौजी था। वह झारखंड प्रदेश के रामगढ़ जिले में सेना के राजपूत रेजीमेंट में एएमपी के पद पर तैनात थे। चार दिसंबर को छोटे भाई बलजीत की शादी में शामिल होने के लिए घर आया था। शनिवार की देर रात वह अपने साथी सिरकुंडा निवासी सतीश वर्मा (26), रामपुर मथुरा इलाके के ही दुलमपुरवा मजरा मरौंचा निवासी रवी चौहान के साथ कार में सवार होकर घर से गोड़ैचा गए थे, जहां से घर लौटते समय बांसुरा स्थित पंचपीर मजार के पास मोड़ पर कार अनियंत्रित होकर गहरे नाले में चली गई थी।
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इस हादसे में कार सवार फौजी समेत तीनों लोगों की मौत हो गई थी। रविवार को पोस्टमार्टम के बाद तीनों दोस्तों के शव घर पहुंचे। सोमवार को फौजी के पार्थिव शरीर के अंतिम संस्कार के लिए तैयारी की गई। शरीर को तिरंगे में लपेटा गया। राजपूत रेजीमेंट झारखंड के सीओ वीरेंद्र सिंह, टुकड़ी के ग्रुप कमांडर शौरभ कुमार समेत 12 सैनिकों के साथ फौजी रंजीत के घर पहुंचे।
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वहीं, सूचना मिलने पर सेवता के पूर्व सपा विधायक महेंद्र सिंह झीन बाबू भी मौके पर पहुंचे और फौजी के पार्थिव शरीर पर पुष्प चक्र चढ़ाकर भावुक पलों में भावभीनी श्रद्घांजलि दी। इसके बाद पूरी तैयारी के बाद शव को गांव के बाहर ले जाया गया, जहां पर दोपहर बाद तीन बजे परे सैन्य सम्मान और शस्त्र सलामी के साथ अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान मौजूद लोगों की आंखें भर आईं। नम आंखों और गमगीन माहौल में फौजी को अंतिम दी गई। अंतिम संस्कार के दौरान गांव समेत आसपास क्षेत्र के काफी संख्या में लोग मौजूद रहे।
हर दिल अजीज थे रंजीत
हादसे में जान गंवाने वाले फौजी रंजीत स्वभाव से मिलनसार और हरदिल अजीज थे। दोस्ती निभाने में भी वह पीछे नहीं थे। तभी तो परिचित की शादी में शामिल होने के लिए उन्होंने छुट्टी बढ़वा ली थी, लेकिन उन्हें क्या पता था कि शनिवार की रात उनकी आखिरी रात होगी। वह संडे का सूरज नहीं देख पाएंगे। भले ही किसी ने इसकी कल्पना न की हो, लेकिन जो हुआ उसने हर किसी को झकझोर दिया। अंतिम संस्कार के दौरान इस तरह की चर्चाएं लोगों की जुबां पर होती रहीं।
फफक कर रोया परिवार
तिरंगे में लिपटा रंजीत का पार्थिव शरीर को जैसे ही अंतिम संस्कार के लिए ले जाने के लिए उठाया गया, वैसे ही फौजी की पत्नी, भाई, मां, बाप समेत पूरा परिवार, रिश्तेदार शव से लिपट पड़े। जोर-जोर से दहाड़े मारकर रोने लगे। मार्मिक मंजर देखकर मौजूद हर किसी का कलेजा कांप उठा। काफी प्रयास के बाद सभी को संभाला गया।