भाजपा ने स्वतंत्र देव की ताजपोशी से साधे कई निशाने, अपना दल का वोट बैंक रिझाने का चला दांव
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परिवहन मंत्री स्वतंत्र देव सिंह की भाजपा प्रदेश अध्यक्ष के रूप में ताजपोशी कर भाजपा ने एक साथ कई निशाने साधने की कोशिश की है। पिछड़ा वर्ग के जमीनी नेता को आगे कर न केवल प्रमुख सहयोगी अपना दल के वोट बैंक को रिझाने का दांव चला है, बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र में यह घोषणा कर प्रदेश की सियासत में काशी को एक बार फिर तवज्जो दी है।
लोकसभा चुनाव में विपक्षियों को करारी शिकस्त देने के बाद भाजपा नए सियासी समीकरणों को साधने में जुटी है। विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा ने केशव प्रसाद मौर्य को प्रदेश अध्यक्ष बनाया और उसे बड़ी जीत मिली।
पिछड़ा वर्ग का चेहरा रहे केशव को उप मुख्यमंत्री बनाया गया और उनकी जगह ब्राह्मण चेहरा रहे डॉ. महेंद्र नाथ पांडेय को कमान सौंपी गई। इस प्रयोग के भी सफल होने के बाद भाजपा के रणनीतिकार फिर से वर्ष 2017 के फार्मूले को दोहराना चाहते हैं। यही कारण है कि सियासी नब्ज भांपने में माहिर स्वतंत्र देव को आगे कर पार्टी पिछड़ा वर्ग को साधने की कोशिश में है।
अपना दल की लोकप्रियता पर पड़ेगा असर
स्वतंत्र देव का पूर्वांचल, अवध, पश्चिम और बुंदेलखंड में समान प्रभाव माना जाता है। कारण, पूर्वांचल के मिर्जापुर के रहने वाले स्वतंत्र देव की सियासत का केंद्र अवध और बुंदेलखंड रहा है। 2014 के लोकसभा चुनाव से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैलियों के प्रभारी के रूप में प्रदेश में उनकी सक्रियता थी।
राजनीतिक जानकार मानते हैं कि उनके प्रदेश अध्यक्ष बनने से अपना दल की लोकप्रियता पर असर पड़ सकता है। पूर्वांचल के दो बड़े पिछड़ा वोट बैंक कुर्मी और राजभर को साधने के लिए भाजपा ने अपना दल और बाद में सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी से गठबंधन किया था। मगर, सहयोगी दलों की महत्वाकांक्षा के चलते भाजपा ने या तो उनसे किनारा कर लिया या कम तवज्जो दी है।
भाजपा के खिलाफ आग उगल रहे सुभासपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर को मुख्यमंत्री आदित्यनाथ ने कैबिनेट से बर्खास्त कर दिया था। कुर्मी बिरादरी में मजबूत पैठ वाली अपना दल (एस) को केंद्र सरकार में जगह नहीं दी गई है।
भाजपा के लिए पूर्वांचल ही प्राथमिकता
देश और प्रदेश की सियासत में भाजपा के लिए पूर्वांचल प्राथमिकता पर है। पूर्वांचल का केंद्र काशी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संसदीय क्षेत्र है और वर्ष 2014 के बाद इस क्षेत्र को भाजपा ने हमेशा तवज्जो दी। प्रदेश में पूर्ण बहुमत के बाद गोरखपुर के सांसद योगी आदित्यनाथ को मुख्यमंत्री बनाकर पूर्वांचल का मान बढ़ाया। इसके अलावा पार्टी केशव प्रसाद मौर्य और डा. महेंद्र नाथ पांडेय को प्रदेश अध्यक्ष बनाकर पूर्वांचल को लेकर अपने इरादे जता चुकी है।