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Haridwar News: बैंक की सील तोड़कर संपत्ति में जबरन घुसने पर प्राथमिकी दर्ज
संवाद न्यूज एजेंसी, हरिद्वार
Updated Sat, 06 Jun 2026 04:23 PM IST
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- रानीपुर कोतवाली क्षेत्र का मामला, पुलिस ने शुरू की विवेचना
हरिद्वार। रानीपुर कोतवाल क्षेत्र में ऋण अदायगी में चूक के बाद कब्जे में ली गई संपत्ति में सील और ताला तोड़कर दोबारा घुसकर कब्जे का प्रयास करने का मामला सामने आया है। पुलिस ने हाउसिंग फाइनेंस कंपनी के प्रतिनिधि की तहरीर पर प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
पुलिस के अनुसार, आर्य नगर चौक स्थित हाउसिंग फाइनेंस कंपनी के लीगल रिप्रेजेंटेटिव कार्तिक चौहान ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि प्रेमनाथ चौधरी ने अपनी आवासीय संपत्ति, दादूपुर-गोविंदपुर को ऋण लेने के लिए कंपनी के पास बंधक रखा था। आरोप है कि ऋणधारक ने नियमित रूप से ईएमआई का भुगतान नहीं किया जिसके चलते भारतीय रिजर्व बैंक के दिशा-निर्देशों के अनुसार पांच अगस्त 2025 को ऋण खाते को एनपीए घोषित कर दिया गया। इसके बाद कंपनी ने सरफेसी अधिनियम-2002 के तहत आवश्यक वैधानिक कार्रवाई पूरी की और 10 नवंबर 2025 को जिला मजिस्ट्रेट हरिद्वार के समक्ष कब्जा दिलाए जाने के लिए आवेदन प्रस्तुत किया।
कार्तिक चौहान का कहना है कि न्यायालय के आदेश के अनुपालन में बीती 27 मई को तहसीलदार हरिद्वार व पुलिस की मौजूदगी में संपत्ति पर कब्जा लेकर उसे सील और लॉक कर दिया था। आरोप है कि उसी दिन प्रेमनाथ चौधरी और उनके परिवारजनों ने बैंक की सील और ताला तोड़कर संपत्ति में जबरन प्रवेश कर लिया। दावा किया कि घटना के वीडियो उनके पास हैं, जिनमें प्रेमनाथ चौधरी के माता-पिता समेत अन्य परिजनों की संलिप्तता दिखाई दे रही है। कोतवाली प्रभारी मनोहर सिंह भंडारी ने बताया कि इस संबंध में प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
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हरिद्वार। रानीपुर कोतवाल क्षेत्र में ऋण अदायगी में चूक के बाद कब्जे में ली गई संपत्ति में सील और ताला तोड़कर दोबारा घुसकर कब्जे का प्रयास करने का मामला सामने आया है। पुलिस ने हाउसिंग फाइनेंस कंपनी के प्रतिनिधि की तहरीर पर प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
पुलिस के अनुसार, आर्य नगर चौक स्थित हाउसिंग फाइनेंस कंपनी के लीगल रिप्रेजेंटेटिव कार्तिक चौहान ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि प्रेमनाथ चौधरी ने अपनी आवासीय संपत्ति, दादूपुर-गोविंदपुर को ऋण लेने के लिए कंपनी के पास बंधक रखा था। आरोप है कि ऋणधारक ने नियमित रूप से ईएमआई का भुगतान नहीं किया जिसके चलते भारतीय रिजर्व बैंक के दिशा-निर्देशों के अनुसार पांच अगस्त 2025 को ऋण खाते को एनपीए घोषित कर दिया गया। इसके बाद कंपनी ने सरफेसी अधिनियम-2002 के तहत आवश्यक वैधानिक कार्रवाई पूरी की और 10 नवंबर 2025 को जिला मजिस्ट्रेट हरिद्वार के समक्ष कब्जा दिलाए जाने के लिए आवेदन प्रस्तुत किया।
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कार्तिक चौहान का कहना है कि न्यायालय के आदेश के अनुपालन में बीती 27 मई को तहसीलदार हरिद्वार व पुलिस की मौजूदगी में संपत्ति पर कब्जा लेकर उसे सील और लॉक कर दिया था। आरोप है कि उसी दिन प्रेमनाथ चौधरी और उनके परिवारजनों ने बैंक की सील और ताला तोड़कर संपत्ति में जबरन प्रवेश कर लिया। दावा किया कि घटना के वीडियो उनके पास हैं, जिनमें प्रेमनाथ चौधरी के माता-पिता समेत अन्य परिजनों की संलिप्तता दिखाई दे रही है। कोतवाली प्रभारी मनोहर सिंह भंडारी ने बताया कि इस संबंध में प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।