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Uttarkashi News: मुआवजा व पुल निर्माण के लिए ग्रामीणों का प्रदर्शन
संवाद न्यूज एजेंसी, उत्तर काशी
Updated Sat, 06 Jun 2026 04:44 PM IST
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ग्रामीणों ने की खेती की सुरक्षा और चरान पर लगी रोक हटाने की मांग
टौंस नदी पार कर कृषि भूमि तक पहुंचने के लिए पुल बनाया जाए
पुरोला। मोरी क्षेत्र के नैटवाड़ बैराज से प्रभावित ग्रामीणों ने अधिग्रहित भूमि का मुआवजा देने और पुल निर्माण के लिए प्रदर्शन किया। ग्रामीणों ने खेती की सुरक्षा और चरान पर लगी रोक हटाने की मांग उठाई। टौंस नदी पार कर कृषि भूमि तक पहुंचने के लिए पुल बनाने की मांग की। ग्रामीणों ने परियोजना प्रबंधन के खिलाफ नारेबाजी की।
नैटवाड़ और गैंचवाण गांव के प्रभावित परिवारों का आरोप है कि 60 मेगावाट की सतलुज नैटवाड़ जल विद्युत परियोजना के बैराज निर्माण के लिए उनकी करीब 27 नाली कृषि भूमि अधिग्रहित की गई थी। इसके अलावा बैराज के पार स्थित लगभग 200 नाली कृषि भूमि तक पहुंच बनाए रखने के लिए कंपनी ने पुल निर्माण, खेती सुरक्षा के लिए सुरक्षात्मक दीवारें बनाने व पशुओं के चरान पर किसी प्रकार की रोक-टोक नहीं लगाने का आश्वासन दिया था।
ग्रामीणों का कहना है कि परियोजना निर्माण कार्य दो वर्ष पूर्व पूरा हो चुका है और जेपी कंपनी ने परियोजना का हस्तांतरण भी कर दिया लेकिन आज तक प्रभावित परिवारों को भूमि का मुआवजा नहीं मिला और न ही अन्य वादों को पूरा किया गया। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि जब तक लंबित मांगों का समाधान नहीं किया जाता तब तक उनका धरना-प्रदर्शन जारी रहेगा।
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परियोजना के महाप्रबंधक नरेश कुमार ने बताया कि प्रभावित ग्रामीणों की अधिग्रहित भूमि के मुआवजा निर्धारण के संबंध में जिलाधिकारी एवं शासन स्तर पर समिति गठित किए जाने को पत्र भेजा गया है। समिति के गठन के बाद आगे की प्रक्रिया जल्द शुरू की जाएगी। प्रदर्शनकारियों में राजेश रावत, सुनील रावत, राजेंद्र रांगड़, सचिन रावत, मच्छीनाथ, विनोद नाथ, प्रताप सिंह रावत, सुवेंद्र, उषा देवी, बिजली देवी, सुरतमा, देवेंद्री, मीना और ईशेंद्री देवी थे। वहीं प्रशासन की ओर से तहसीलदार मोरी सरदार सिंह चौहान, थानाध्यक्ष दीपक सिंह रावत वहां पहुंचे थे।
टौंस नदी पार कर कृषि भूमि तक पहुंचने के लिए पुल बनाया जाए
पुरोला। मोरी क्षेत्र के नैटवाड़ बैराज से प्रभावित ग्रामीणों ने अधिग्रहित भूमि का मुआवजा देने और पुल निर्माण के लिए प्रदर्शन किया। ग्रामीणों ने खेती की सुरक्षा और चरान पर लगी रोक हटाने की मांग उठाई। टौंस नदी पार कर कृषि भूमि तक पहुंचने के लिए पुल बनाने की मांग की। ग्रामीणों ने परियोजना प्रबंधन के खिलाफ नारेबाजी की।
नैटवाड़ और गैंचवाण गांव के प्रभावित परिवारों का आरोप है कि 60 मेगावाट की सतलुज नैटवाड़ जल विद्युत परियोजना के बैराज निर्माण के लिए उनकी करीब 27 नाली कृषि भूमि अधिग्रहित की गई थी। इसके अलावा बैराज के पार स्थित लगभग 200 नाली कृषि भूमि तक पहुंच बनाए रखने के लिए कंपनी ने पुल निर्माण, खेती सुरक्षा के लिए सुरक्षात्मक दीवारें बनाने व पशुओं के चरान पर किसी प्रकार की रोक-टोक नहीं लगाने का आश्वासन दिया था।
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ग्रामीणों का कहना है कि परियोजना निर्माण कार्य दो वर्ष पूर्व पूरा हो चुका है और जेपी कंपनी ने परियोजना का हस्तांतरण भी कर दिया लेकिन आज तक प्रभावित परिवारों को भूमि का मुआवजा नहीं मिला और न ही अन्य वादों को पूरा किया गया। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि जब तक लंबित मांगों का समाधान नहीं किया जाता तब तक उनका धरना-प्रदर्शन जारी रहेगा।
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परियोजना के महाप्रबंधक नरेश कुमार ने बताया कि प्रभावित ग्रामीणों की अधिग्रहित भूमि के मुआवजा निर्धारण के संबंध में जिलाधिकारी एवं शासन स्तर पर समिति गठित किए जाने को पत्र भेजा गया है। समिति के गठन के बाद आगे की प्रक्रिया जल्द शुरू की जाएगी। प्रदर्शनकारियों में राजेश रावत, सुनील रावत, राजेंद्र रांगड़, सचिन रावत, मच्छीनाथ, विनोद नाथ, प्रताप सिंह रावत, सुवेंद्र, उषा देवी, बिजली देवी, सुरतमा, देवेंद्री, मीना और ईशेंद्री देवी थे। वहीं प्रशासन की ओर से तहसीलदार मोरी सरदार सिंह चौहान, थानाध्यक्ष दीपक सिंह रावत वहां पहुंचे थे।