दमोह वन मंडल अंतर्गत ग्राम पंचायत गुंजी में शुक्रवार दोपहर उस समय हड़कंप मच गया, जब करंट लगने से राष्ट्रीय पक्षी मोर के तीन बच्चों की मौत हो गई। घटना के बाद गांव में अफरातफरी का माहौल बन गया और बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुंच गए। सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और पूरे मामले की जांच शुरू कर दी।
ट्रांसफार्मर पर बैठे थे तीनों मोर
प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, गांव के पास स्थित तालाब से पानी पीने के बाद तीनों मोर पास लगे ट्रांसफार्मर पर जाकर बैठ गए थे। उस समय बिजली आपूर्ति बंद थी। ग्रामीणों के अनुसार जैसे ही अचानक बिजली सप्लाई शुरू हुई, तीनों मोर हाई वोल्टेज करंट की चपेट में आ गए। तेज झटके के कारण तीनों की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। घटना के बाद आसपास मौजूद लोगों ने तुरंत वन विभाग और प्रशासन को सूचना दी। कुछ ही देर में वन अमला मौके पर पहुंच गया और घटनास्थल का निरीक्षण शुरू किया गया।
डीएफओ, तहसील प्रशासन और वन अमला पहुंचा मौके पर
मामले की गंभीरता को देखते हुए वन मंडल अधिकारी (DFO) ईश्वर जरांडे, नायब तहसीलदार अभाना मंडल आशुतोष गुप्ता, रेंजर प्रभारी अखिलेश चौरसिया सहित वन विभाग की टीम गांव पहुंची। अधिकारियों की मौजूदगी में पंचनामा कार्रवाई की गई और मृत मोरों का पोस्टमार्टम कराया गया। बाद में नियमानुसार उनका अंतिम संस्कार भी किया गया।
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जांच में नया मोड़, एक आरोपी हिरासत में
वन विभाग की जांच के दौरान मामला उस समय और गंभीर हो गया, जब यह जानकारी सामने आई कि गांव में बिना सूचना मोरों को रखे जाने की बात भी सामने आई है। वन विभाग ने संदेह के आधार पर एक आरोपी को हिरासत में लिया है और उससे पूछताछ की जा रही है। सूत्रों के मुताबिक, वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत कार्रवाई की तैयारी की जा रही है। हालांकि विभागीय अधिकारी फिलहाल पूरे मामले की विस्तृत जांच के बाद ही अंतिम स्थिति स्पष्ट होने की बात कह रहे हैं।
डीएफओ बोले- हर पहलू से जांच जारी
वन मंडल अधिकारी ईश्वर जरांडे ने बताया कि प्रथम दृष्टया मामला करंट लगने से मोरों की मौत का प्रतीत हो रहा है। घटना के समय मोर ट्रांसफॉर्मर पर बैठे हुए थे और बिजली बहाल होते ही हादसा हुआ। साथ ही अन्य बिंदुओं पर भी जांच की जा रही है। जांच रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
राष्ट्रीय पक्षी की मौत से ग्रामीणों में नाराजगी
एक साथ तीन मोरों की मौत से ग्रामीणों में भी नाराजगी और दुख का माहौल है। लोगों ने क्षेत्र में खुले विद्युत उपकरणों और ट्रांसफार्मरों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि ट्रांसफार्मर के आसपास सुरक्षा इंतजाम बेहतर होते, तो शायद राष्ट्रीय पक्षियों की जान बचाई जा सकती थी।