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Iran-US Tensions: 'भरोसे के लायक नहीं अमेरिका', हमलों पर भड़का ईरान; इंटरनेट बहाली के बीच फिर बढ़ा तनाव

वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, तेहरान Published by: हिमांशु सिंह चंदेल Updated Wed, 27 May 2026 04:30 AM IST
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सार

दक्षिणी ईरान में अमेरिकी हमलों के बाद ईरान ने अमेरिका पर युद्धविराम तोड़ने और बदनीयती दिखाने का आरोप लगाया है। ईरान ने जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी है। इसी बीच लंबे समय बाद इंटरनेट सेवाएं धीरे-धीरे बहाल की जा रही हैं।

Iran condemns US strikes as show of bad faith begin restoring internet after long shutdown
अमेरिकी हमलों पर ईरान ने बोला बड़ा हमला - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार

ईरान और अमेरिका के बीच तनाव एक बार फिर खुलकर सामने आ गया है। दक्षिणी ईरान में अमेरिकी हमलों के बाद तेहरान ने अमेरिका पर युद्धविराम तोड़ने और बदनीयती दिखाने का आरोप लगाया है। ईरान ने साफ कहा है कि वह किसी भी हमले का जवाब दिए बिना नहीं छोड़ेगा। दूसरी तरफ लंबे समय से बंद इंटरनेट सेवाओं को भी अब धीरे-धीरे बहाल किया जा रहा है। इस बीच होर्मुज जलडमरूमध्य, तेल सप्लाई और युद्धविराम वार्ता को लेकर पूरी दुनिया की नजरें खाड़ी क्षेत्र पर टिक गई हैं।


अमेरिका और ईरान के बीच आखिर क्या हुआ?
अमेरिकी सेना ने सोमवार को दक्षिणी ईरान में कुछ ठिकानों पर हमला किया। अमेरिका का कहना है कि यह कार्रवाई रक्षात्मक थी और इसमें मिसाइल लॉन्च साइट्स तथा बारूदी सुरंग बिछाने वाली नौकाओं को निशाना बनाया गया। अमेरिका ने दावा किया कि उसने संयम के साथ कार्रवाई की। लेकिन ईरान ने इसे सीधा युद्धविराम का उल्लंघन बताया। ईरान के विदेश मंत्रालय ने कहा कि अमेरिका भरोसे के लायक नहीं है और अब हर परिणाम की जिम्मेदारी वॉशिंगटन की होगी। ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड ने यह भी दावा किया कि उसने अपने हवाई क्षेत्र में घुसे एक ड्रोन को मार गिराया और दूसरे ड्रोन तथा लड़ाकू विमान को पीछे हटने पर मजबूर कर दिया।
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क्या बातचीत और युद्धविराम अब खतरे में है?
ईरान और अमेरिका के बीच कतर में बातचीत चल रही थी, जिसका मकसद युद्धविराम को आगे बढ़ाना और हालात को सामान्य करना था। लेकिन ताजा हमलों के बाद स्थिति फिर तनावपूर्ण हो गई है। ईरान की सरकारी मीडिया के मुताबिक संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाकर कालीबाफ और विदेश मंत्री अब्बास अराघची कतर से लौट चुके हैं। हालांकि आगे की रणनीति पर अभी कुछ साफ नहीं कहा गया है। अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा है कि युद्धविराम और होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर खोलने पर बातचीत में अभी कुछ दिन लग सकते हैं। ऐसे में दोनों देशों के बीच भरोसे की कमी साफ दिखाई दे रही है।

इंटरनेट बंद होने से ईरान को कितना नुकसान हुआ?
ईरान ने कई महीनों तक इंटरनेट सेवाएं बंद रखीं। सरकार का कहना था कि यह कदम युद्ध और सुरक्षा कारणों से उठाया गया। अब धीरे-धीरे इंटरनेट बहाल किया जा रहा है। कुछ इलाकों में ब्रॉडबैंड सेवा शुरू हो गई है, लेकिन मोबाइल इंटरनेट अभी पूरी तरह चालू नहीं हुआ है। इंटरनेट बंद होने से विदेशों में रह रहे ईरानी अपने परिवारों से संपर्क नहीं कर पा रहे थे। ऑनलाइन कारोबार भी बुरी तरह प्रभावित हुए। रिपोर्ट के मुताबिक, इंटरनेट बंद रहने से ईरान की अर्थव्यवस्था को हर दिन 3 से 4 करोड़ डॉलर तक का नुकसान हुआ। पहले भी सरकार विरोधी प्रदर्शनों के दौरान इंटरनेट बंद किया गया था।

जासूसी के आरोप में फांसी और होर्मुज पर बढ़ी चिंता?
ईरान ने इस्राइल के लिए जासूसी करने के आरोप में एक व्यक्ति को फांसी दे दी। ईरानी एजेंसी मिजान ऑनलाइन के मुताबिक, गुलामरेजा खानी शकराब पर मोसाद के लिए काम करने और लोगों की भर्ती करने का आरोप था। वहीं दूसरी तरफ होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर दुनिया की चिंता बढ़ गई है। युद्ध शुरू होने के बाद ईरान ने इस समुद्री रास्ते को काफी हद तक बंद कर दिया था। इसी रास्ते से दुनिया का बड़ा हिस्सा तेल और गैस सप्लाई होता है। ईरान अब सीमित जहाजों को गुजरने दे रहा है और शुल्क भी वसूल रहा है। रिवोल्यूशनरी गार्ड ने दावा किया कि पिछले 24 घंटे में 25 जहाजों को गुजरने दिया गया।

दुनिया पर कितना बड़ा असर पड़ सकता है?
होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव बढ़ने का असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। तेल, गैस और खाद की सप्लाई पहले ही प्रभावित हो चुकी है। संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन ने चेतावनी दी है कि अगर हालात नहीं सुधरे तो आने वाले वर्षों में खाद्य संकट गहरा सकता है। खाड़ी क्षेत्र में जहाजों की आवाजाही कम होने से वैश्विक बाजारों में भी चिंता बढ़ गई है। ओमान की खाड़ी में मंगलवार को एक टैंकर में धमाके की खबर भी सामने आई, हालांकि इसमें कोई घायल नहीं हुआ। ऐसे में ईरान, अमेरिका और इस्राइल के बीच बढ़ता तनाव पूरी दुनिया के लिए चिंता का विषय बन गया है।
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