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US Refugee Cap: ट्रंप प्रशासन ने बढ़ाया अमेरिकी शरणार्थी कोटा, लेकिन सिर्फ श्वेत दक्षिण अफ्रीकी समुदाय को राहत
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन
Published by: Pavan
Updated Wed, 27 May 2026 02:11 AM IST
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सार
US Refugee Cap: अमेरिकी में ट्रंप प्रशासन ने दक्षिण अफ्रीका के 10 हजार श्वेत अफ्रीकानरों को शरणार्थी के तौर पर अमेरिका में प्रवेश देने का फैसला किया है। इससे कुल शरणार्थी सीमा 17,500 हो गई। आलोचकों का कहना है कि अन्य देशों के जरूरतमंद शरणार्थियों के लिए अब भी रास्ते बंद हैं।
डोनाल्ड ट्रंप, अमेरिकी राष्ट्रपति
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने शरणार्थियों को लेकर बड़ा फैसला लिया है। ट्रंप प्रशासन ने इस साल अमेरिका में आने वाले शरणार्थियों की संख्या बढ़ाने का ऐलान किया है, लेकिन यह राहत मुख्य रूप से दक्षिण अफ्रीका के श्वेत नागरिकों यानी अफ्रीकानर समुदाय के लिए दी गई है। इस फैसले के बाद दुनिया के कई अन्य देशों से शरण मांग रहे लोगों को अब भी इंतजार करना पड़ रहा है। ट्रंप प्रशासन ने कहा है कि वह इस साल अतिरिक्त 10 हजार श्वेत दक्षिण अफ्रीकी नागरिकों को शरणार्थी के तौर पर अमेरिका आने की अनुमति देगा।
यह भी पढ़ें- Trump Health: फिर मेडिकल जांच के लिए पहुंचे ट्रंप, जानें व्हाइट हाउस ने अमेरिकी राष्ट्रपति की सेहत पर क्या कहा
दक्षिण अफ्रीका के श्वेत लोगों का एक समूह है अफ्रीकानर समुदाय
इससे अमेरिका का कुल शरणार्थी कोटा बढ़कर 17,500 हो जाएगा। इससे पहले प्रशासन ने लगभग 7,500 लोगों को अनुमति देने की योजना बनाई थी। अफ्रीकानर समुदाय दक्षिण अफ्रीका के श्वेत लोगों का एक समूह है, जिनकी जड़ें मुख्य रूप से डच उपनिवेशवादियों से जुड़ी मानी जाती हैं। ट्रंप प्रशासन का दावा है कि दक्षिण अफ्रीका में इस समुदाय के खिलाफ नस्लीय हिंसा और भेदभाव बढ़ रहा है। हालांकि दक्षिण अफ्रीका की सरकार ने इन आरोपों को खारिज किया है।
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मानवीय आधार पर अफ्रीकानर समुदाय को शरण
फेडरल रजिस्टर में जारी नोटिस में ट्रंप ने कहा कि दक्षिण अफ्रीका में 'नस्लीय हिंसा भड़काने की घटनाओं' में बढ़ोतरी हुई है और यह एक 'आपातकालीन शरणार्थी स्थिति' बन चुकी है। उन्होंने कहा कि मानवीय आधार पर अफ्रीकानर समुदाय को अमेरिका में शरण देना राष्ट्रीय हित में है। ट्रंप ने राष्ट्रपति बनने के पहले ही दिन अमेरिका के शरणार्थी कार्यक्रम को निलंबित कर दिया था। इसके बाद से यह कार्यक्रम लगभग सिर्फ दक्षिण अफ्रीका के श्वेत अफ्रीकानरों के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। आलोचकों का कहना है कि इससे युद्ध, हिंसा और संकट से भाग रहे दूसरे देशों के हजारों लोग फंस गए हैं और उनके पास अमेरिका आने का रास्ता लगभग बंद हो गया है।
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, अक्तूबर 2025 से शुरू हुए वित्तीय वर्ष में अब तक अमेरिका ने शरणार्थी कार्यक्रम के तहत छह हजार से ज्यादा लोगों को प्रवेश दिया है। इनमें लगभग सभी दक्षिण अफ्रीका से थे, जबकि केवल तीन लोग अफगानिस्तान से आए। अमेरिका में हर साल कितने शरणार्थियों को प्रवेश मिलेगा, इसकी सीमा राष्ट्रपति तय करते हैं। पहले यह व्यवस्था दुनिया के अलग-अलग क्षेत्रों में युद्ध और मानवीय संकट को ध्यान में रखकर बनाई जाती थी। लेकिन ट्रंप प्रशासन के फैसले को लेकर अब सवाल उठ रहे हैं कि क्या अमेरिका का शरणार्थी कार्यक्रम अब केवल चुनिंदा समूहों तक सीमित हो रहा है।
यह भी पढ़ें- Israel-Hezbollah: लितानी नदी पर फिर भड़की इस्राइल-हिजबुल्ला जंग, नेतन्याहू बोले- और तेज होंगे सैन्य अभियान
मानवाधिकार संगठनों और शरणार्थियों के पुनर्वास का काम करने वाली संस्थाओं ने इस फैसले की आलोचना की है। संस्था एचआईएएस की प्रमुख बेथ ओपेनहाइम ने कहा कि करीब 50 वर्षों तक अमेरिका का शरणार्थी कार्यक्रम दुनिया के सबसे कमजोर और जरूरतमंद लोगों को सुरक्षा देने का प्रतीक रहा है, लेकिन मौजूदा प्रशासन इस व्यवस्था को कमजोर कर रहा है। अमेरिका में शरणार्थी कार्यक्रम और शरण प्रक्रिया अलग-अलग होती हैं। शरणार्थी बनने के लिए लोगों को अमेरिका आने से पहले विदेश में ही जांच और सुरक्षा प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है, जबकि शरण मांगने वाले लोग पहले से अमेरिका की जमीन पर मौजूद होते हैं।
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दक्षिण अफ्रीका के श्वेत लोगों का एक समूह है अफ्रीकानर समुदाय
इससे अमेरिका का कुल शरणार्थी कोटा बढ़कर 17,500 हो जाएगा। इससे पहले प्रशासन ने लगभग 7,500 लोगों को अनुमति देने की योजना बनाई थी। अफ्रीकानर समुदाय दक्षिण अफ्रीका के श्वेत लोगों का एक समूह है, जिनकी जड़ें मुख्य रूप से डच उपनिवेशवादियों से जुड़ी मानी जाती हैं। ट्रंप प्रशासन का दावा है कि दक्षिण अफ्रीका में इस समुदाय के खिलाफ नस्लीय हिंसा और भेदभाव बढ़ रहा है। हालांकि दक्षिण अफ्रीका की सरकार ने इन आरोपों को खारिज किया है।
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आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, अक्तूबर 2025 से शुरू हुए वित्तीय वर्ष में अब तक अमेरिका ने शरणार्थी कार्यक्रम के तहत छह हजार से ज्यादा लोगों को प्रवेश दिया है। इनमें लगभग सभी दक्षिण अफ्रीका से थे, जबकि केवल तीन लोग अफगानिस्तान से आए। अमेरिका में हर साल कितने शरणार्थियों को प्रवेश मिलेगा, इसकी सीमा राष्ट्रपति तय करते हैं। पहले यह व्यवस्था दुनिया के अलग-अलग क्षेत्रों में युद्ध और मानवीय संकट को ध्यान में रखकर बनाई जाती थी। लेकिन ट्रंप प्रशासन के फैसले को लेकर अब सवाल उठ रहे हैं कि क्या अमेरिका का शरणार्थी कार्यक्रम अब केवल चुनिंदा समूहों तक सीमित हो रहा है।
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मानवाधिकार संगठनों और शरणार्थियों के पुनर्वास का काम करने वाली संस्थाओं ने इस फैसले की आलोचना की है। संस्था एचआईएएस की प्रमुख बेथ ओपेनहाइम ने कहा कि करीब 50 वर्षों तक अमेरिका का शरणार्थी कार्यक्रम दुनिया के सबसे कमजोर और जरूरतमंद लोगों को सुरक्षा देने का प्रतीक रहा है, लेकिन मौजूदा प्रशासन इस व्यवस्था को कमजोर कर रहा है। अमेरिका में शरणार्थी कार्यक्रम और शरण प्रक्रिया अलग-अलग होती हैं। शरणार्थी बनने के लिए लोगों को अमेरिका आने से पहले विदेश में ही जांच और सुरक्षा प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है, जबकि शरण मांगने वाले लोग पहले से अमेरिका की जमीन पर मौजूद होते हैं।