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Iran US Peace Deal: 'शांति समझौते का मसौदा पूरी तरह फर्जी और मनगढ़ंत', ईरान के दावों पर भड़का व्हाइट हाउस
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन
Published by: शिवम गर्ग
Updated Wed, 27 May 2026 09:45 PM IST
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सार
ईरानी मीडिया द्वारा जारी कथित शांति समझौते के मसौदे को व्हाइट हाउस ने पूरी तरह फर्जी बताया है। रिपोर्ट में होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने और अमेरिकी सेना हटाने का दावा किया गया था।
अमेरिका-ईरान वार्ता अब भी तनावपूर्ण।
- फोटो : Amar Ujala Graphics
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विस्तार
ईरान और अमेरिका के बीच संभावित शांति समझौते को लेकर सामने आई रिपोर्ट पर व्हाइट हाउस ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। ईरानी सरकारी मीडिया द्वारा जारी कथित मसौदे को अमेरिका ने पूरी तरह फर्जी और मनगढ़ंत करार दिया है। व्हाइट हाउस के आधिकारिक संचार मंच रैपिड रिस्पॉन्स 47 की ओर से जारी बयान में कहा गया कि ईरानी मीडिया द्वारा प्रसारित यह रिपोर्ट सच नहीं है और कथित समझौता ज्ञापन पूरी तरह से झूठा है।
बयान में कहा गया "ईरान नियंत्रित मीडिया की यह रिपोर्ट सही नहीं है। उन्होंने जो समझौता (MoU) जारी किया है, वह पूरी तरह मनगढ़ंत है। किसी को भी ईरानी सरकारी मीडिया के दावों पर भरोसा नहीं करना चाहिए। तथ्य मायने रखते हैं।"
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ईरानी मीडिया ने क्या दावा किया था?
ईरानी सरकारी टीवी की रिपोर्ट के मुताबिक, कथित समझौते के मसौदे में होर्मुज जलडमरूमध्य के जरिए व्यापारिक जहाजों की आवाजाही को एक महीने के भीतर बहाल करने का प्रस्ताव था। रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया कि अमेरिका ईरान के आसपास के क्षेत्रों से अपनी सैन्य मौजूदगी कम करेगा और नौसैनिक नाकेबंदी हटाएगा।
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इसके अलावा कहा गया कि इस व्यवस्था में सैन्य जहाज शामिल नहीं होंगे और ओमान के साथ समन्वय में ईरान जलडमरूमध्य में जहाजों की निगरानी करेगा। ईरानी मीडिया ने यह भी दावा किया कि बिना ठोस सत्यापन के तेहरान कोई कदम नहीं उठाएगा। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि यदि 60 दिनों के भीतर अंतिम समझौता हो जाता है, तो इसे संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के बाध्यकारी प्रस्ताव के रूप में लागू किया जा सकता है। हालांकि, कथित मसौदे में ईरान के परमाणु कार्यक्रम का कोई जिक्र नहीं था।
परमाणु हथियार किसी कीमत पर नहीं, डील पर ट्रंप का सख्त रुख
कैबिनेट बैठक के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान समझौता करना चाहता है, लेकिन अब तक वह सफल नहीं हो पाया है। उन्होंने कहा कि अमेरिका इस प्रक्रिया से पूरी तरह संतुष्ट नहीं है, लेकिन आगे स्थिति बेहतर हो सकती है। ट्रंप ने यह भी संकेत दिया कि अगर बातचीत सफल नहीं होती है तो अमेरिका काम पूरा करने के विकल्प पर भी विचार कर सकता है।
उन्होंने यह भी कहा कि ईरान ने अमेरिका को कम आंकने की कोशिश की, लेकिन अब वास्तविकता अलग है। ट्रंप के अनुसार, ईरान की स्थिति ऐसी है कि वह मजबूरी में बातचीत की मेज पर आया है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने दोहराया कि ईरान को किसी भी हाल में परमाणु हथियार रखने की अनुमति नहीं दी जाएगी। उन्होंने कहा कि यह कदम केवल अमेरिका के लिए नहीं, बल्कि पूरी दुनिया की सुरक्षा के लिए जरूरी है। ट्रंप ने यह भी दावा किया कि इस मुद्दे पर कई देशों का समर्थन उन्हें मिल रहा है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी ईरान को परमाणु हथियार से रोकने की मांग मजबूत है।
ट्रंप ने दावा किया कि ईरान की नौसेना और वायुसेना कमजोर हो चुकी है और देश आर्थिक संकट से गुजर रहा है। उनके अनुसार ईरान की अर्थव्यवस्था गहरे संकट में है और महंगाई बहुत अधिक स्तर पर पहुंच चुकी है, जिससे उसकी मुद्रा का मूल्य लगातार गिर रहा है।
फिलहाल क्या है बातचीत की स्थिति?
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने मंगलवार को कहा था कि बातचीत को अंतिम रूप देने में अभी कई दिन लग सकते हैं। हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में दावा किया था कि समझौता जल्द हो सकता है। बातचीत में सबसे बड़ा मुद्दा होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोलना और उसके नियंत्रण को लेकर बना हुआ है। यह दुनिया का बेहद अहम समुद्री मार्ग माना जाता है, जहां से वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरताहै। इसके अलावा ईरान के परमाणु ढांचे को खत्म करने की मांग भी दोनों देशों के बीच बड़ा विवाद बना हुआ है।
फिर बढ़ सकता है तनाव?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस मुद्दे पर चर्चा के लिए कैंप डेविड में अपनी कैबिनेट की अहम बैठक बुलाई थी। हालांकि राष्ट्रपति ने शनिवार को दावा किया था कि तेहरान के साथ एक सौदा करीब है, बातचीत अभी भी तनावपूर्ण बनी हुई है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने चेतावनी दी थी कि यदि बातचीत विफल होती है तो ईरान पर सैन्य हमले फिर से शुरू हो सकते हैं। सोमवार को अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने दक्षिणी ईरान और क्षेत्र में नावों को निशाना बनाने वाले हमलों की पुष्टि की, हालांकि उन्होंने कहा कि युद्धविराम अभी भी बना हुआ है।