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धूल फांक रहा आस्थापथ के जीर्णोंद्घार के बजट का प्रस्ताव

Updated Tue, 13 Jun 2017 02:07 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
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ऋषिकेश।
सरकार व प्रशासन जन सुरक्षा को लेकर कितना संवेदनशील है? इस बात का अंदाजा वर्ष 2013 की दैवीय आपदा में क्षतिग्रस्त हुए तीर्थनगरी के आस्थापथ देख कर लगाया जा सकता है। बाढ़ से आस्थापथ के निचले हिस्से में कई जगहों पर बड़े-बड़े गड्ढे हो गए हैं। कटाव से रास्ता पूरी तरह से ध्वस्त होने की आशंका बनी हुई है। इससे नदी किनारे बसी कॉलोनियों की सुरक्षा पर भी खतरा मंडरा रहा है।
वर्ष 2013 की दैवीय आपदा में त्रिवेणीघाट से बैराज तक करीब ढाई किलोमीटर लंबा आस्थापथ कई स्थानों पर बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गया था। शासन स्तर से प्रस्ताव को टीएसी को भेजा गया। टेक्निकल ऑडिट सेल ने योजना का स्थलीय निरीक्षण व सर्वे किया। सर्वे में यह बात सामने आई कि आस्थापथ के नीचे नदी की साइड से काफी गहरे गड्ढे हो गए हैं, साथ ही कई स्थानों पर आस्थापथ में बनाए गए ब्लॉक क्षतिग्रस्त हैं। सिंचाई विभाग उपखंड ऋषिकेश ने वर्ष- 2015 में इस आस्थापथ के जीर्णोद्धार के लिए 10, 56, 83000 रुपये का प्रस्ताव शासन को भेजा था। जिसे आज तक मंजूरी नहीं मिल पाई है। ऐसे में सरकार की अनदेखी का खामियाजा आने वाली बरसात में नदी तटीय इलाकों में रहने वाले लोगों को भुगतना पड़ सकता है। लोगों को बरसात के दिनों में गंगा के जलस्तर बढ़ने और उससे भू- कटाव से होने वाली तबाही का डर सता रहा है।
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गौरतलब है कि तीर्थनगरी के आस्थापथ के किनारे कोयलघाटी, वीरभद्र, बैराज, गैरोलानगर, गंगाविहार आदि कॉलोनियां हैं। इसके अलावा आस्थापथ से बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग के नगर के पैच को भी सुरक्षा मिल रही है। पथ के सहारे बरसात के दौरान गंगा के उफान व बाढ़ से इन क्षेत्रों की भूकटाव की रोकथाम भी हो जाती है।
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विभागीय जांच में गंगा किनारे बने आस्थापथ की बाउंड्रीवाल के नीचे आपदा से बड़े-बड़े गड्ढे हो गए हैं। उपखंड द्वारा विभाग को आस्थापथ के जीर्णोद्धार का प्रस्ताव भेजा जा चुका है। शासन से योजना को मंजूरी मिलने पर पथ के जीर्णोद्धार का कार्य किया जाएगा।
पीएल नौटियाल, सहायक अभियंता सिंचाई विभाग, ऋषिकेश
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