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उत्तराखंडः हाईवे बनाने के लिए काट डाले 19 हजार से ज्यादा पेड़

रजा शास्त्री/अमर उजाला, देहरादून Updated Thu, 28 Apr 2016 03:41 AM IST

सार

  • राष्ट्रीय राजमार्ग बना नहीं कार्बन डाई आक्साइड बढ़ गई
  • पेड़ भी कटे और प्रदूषण भी लगातार बढ़ रहा है
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एनएच-72 - फोटो : SanjayNegi/AmarUjala
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विस्तार
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राष्ट्रीय राजमार्ग-72 के चक्कर में 19 हजार 841 पेड़ काटे गए और परियोजना बीच में ही लटक गई। नियमानुसार एक पेड़ काटने के एवज में दो पौधे रोपने का कानूनी प्रावधान है, मगर एक भी पौधा नहीं लगाया गया। ग्लोबल वार्मिंग के इस दौर में कार्बन उत्सर्जन के दुष्प्रभावों से बचने के लिए जब एक-एक पेड़ महत्वपूर्ण माना जा रहा है, यहां पेड़ कटने से भारी मात्रा में कार्बन डाई आक्साइड वातावरण में घुल रही है।
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राष्ट्रीय राजमार्ग के लिए पेड़ तो कटवा दिए गए, लेकिन शर्त के अनुसार वनीकरण नहीं किया गया। राष्ट्रीय राजमार्ग की वजह से 39 किमी रास्ता खुदा पड़ा है। इससे गर्द गुबार, वाहनों के जाम से निकले धुएं के कारण वैसे ही प्रतिदिन कार्बन डाई आक्साइड वातावरण में घुल रही है। इस पर वन विभाग की 80.633 हेक्टेयर भूमि पेड़ों से खाली कर दी गई।

विज्ञानियों का कहना है कि एक पेड़ में उसके शुष्क भार का 50 फीसदी कार्बन होता है। पेड़ कटने से यह कार्बन बाहर आ जाता है, फिर यह कार्बन 3.6 गुना अधिक कार्बन डाई आक्साइड में तब्दील होता है, जो पर्यावरण के लिए खतरनाक है।
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काटने पर पेड़ के अंदर से निकलता है कार्बन 

एनएच-72 - फोटो : SanjayNegi/AmarUjala
भारतीय वन अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद के वरिष्ठ जलवायु परिवर्तन विज्ञानी डा. वीआरएस रावत का कहना है कि पेड़ कटने से दोहरा नुकसान होता है। एक तो माहौल की कार्बन आक्साइड की खपत नहीं हो पाती, दूसरे पेड़ों के अंदर का कार्बन स्टाक बाहर आ जाता है। यह पेड़ की आयु और आकार पर तय होता है कि उसके अंदर कितना कार्बन स्टाक होगा।

क्षति बचाने को डेढ़ लाख पौधे लगाने पड़ेंगे
वन अनुसंधान संस्थान के जलवायु परिवर्तन विभागाध्यक्ष डा. हुकुम सिंह का कहना है कि वन अधिनियम के मुताबिक एक पेड़ कटने पर उसके स्थान पर दो पेड़ लगाए जाएं। एक हेक्टेयर भूमि से अगर सारे पेड़ हटाए जाते हैं तो दो हेक्टेयर पर वनीकरण होगा। दो हजार पौधे प्रति हेक्टेयर लगाए जाते हैं।

विज्ञानियों का कहना है कि ये अधिनियम में प्रावधान हैं। वैसे 20 हजार पेड़ कटे हैं और इससे जितना कार्बन निकला है, उसके दुष्प्रभाव खत्म करने के लिए कम से कम डेढ़ लाख पौधे लगाए जाने की जरूरत पड़ेगी।
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