विधानसभा चुनाव नजदीक आते ही संभावित प्रत्याशियों को लेकर अटकलों का बाजार गर्म होने लगा है, जिसका जिले की तीन विधानसभाओं में खासा असर देखने को मिल रहा है।
टिहरी जिले में कई कद्दावारों के उतरने की संभावना हर सीट को रोचक बना रही है। सरकार में शामिल तीन कैबिनेट मंत्री, सत्ताधारी दल के प्रदेश अध्यक्ष से लेकर दो-दो पूर्व कैबिनेट मंत्री भी चुनाव मैदान में उतरने को आतुर हैं। नेता एवं उनके कार्यकर्ता चुनावी बिसात बिछाने में लगे हुए हैं।
टिहरी से 2012 के विधानसभा चुनाव में दिनेश धनै ने किशोर उपाध्याय को 333 वोट से पराजित किया था। लेकिन वर्तमान में दिनेश धनै कांग्रेस सरकार में पर्यटन एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री हैं। किशोर उपाध्याय सत्ताधरी दल के प्रदेश अध्यक्ष है। धनै निर्दलीय चुनाव मैदान में उतरने का एलान कर चुके हैं, जबकि उपाध्याय के कार्यकर्ता जोरशोर से अपने नेता की चुनावी तैयारी में जुटे हुए हैं। कांग्रेसियों का दावा है कि किशोर टिहरी से ही चुनाव लड़ेगे।
हालांकि टिहरी विधानसभा से किशोर उपाध्याय के लड़ने न लड़ने को लेकर भी खूब चर्चा लोगों में हो रही है। देवप्रयाग से पिछले चुनाव में पूर्व मंत्री दिवाकर भट्ट को 1541 मत से पराजित करने वाले मंत्री प्रसाद नैथानी सरकार में शिक्षा मंत्री है। मंत्री प्रसाद, दिवाकर भट्ट, पूर्व मंत्री शूरवीर सजवाण भी दमखम से चुनाव की तैयारियों लगे हुए हैं।
सरकार में शहरी विकास मंत्री प्रीतम पंवार भी यमुनोत्री छोड़कर टिहरी जिले के धनोल्टी विधानसभा से निर्दलीय चुनाव लड़ने की घोषणा कर चुके है। यदि टिहरी से उपाध्याय, धनै, देवप्रयाग से नैथानी, दिवाकर, सजवाण, धनोल्टी से प्रीतम चुनाव मैदान में उतरे तो इन सीटों पर मुकाबला रोचक हो सकता है।