पुरातत्व विभाग अल्मोड़ा में राज्य संरक्षित श्रेणी के 12वीं शताब्दी में निर्मित मुंडेश्वर महादेव के एक ओर झुके मंदिर समूहों को अपलिफ्ट कर मूल स्वरूप दे रहा है।
मूल स्वरूप में स्थापित कर दिया
राज्य में पुरातत्व विभाग द्वारा मंदिरों को अपलिफ्ट करने का यह पहला प्रयास है। विभाग ने मंदिर समूह के चार में से दो मंदिरों को अपलिफ्ट कर मूल स्वरूप में स्थापित भी कर दिया है। अल्मोड़ा नगर से करीब 15 किमी दूर सिरोनियां के निकट सुयाल और सूपे नदी के संगम पर प्राचीन मुंडेश्वर मंदिर समूह है।
मंदिर समूह 14वीं से 16वीं सदी में निर्मित हैं। मुंडेश्वर मंदिर परिसर में मुख्य मंदिर के अलावा पांच लघु देवालय भी हैं। लघु देवालयों की ऊंचाई करीब तीन से पांच मीटर है। देवालयों के मध्य में मंदिर के जंघा भाग के ऊपर पट्टिका में राजा अर्जुन देव का शाके 1302 की शिला पट्टिका है।
मुंडेश्वर महादेव मंदिर में चार मंदिरों का समूह एक तरफ झुक गया था। इससे जहां मंदिर का मूल स्वरूप प्रभावित हो रहा था, वहीं इनके गिरने का खतरा भी हो गया था। पुरातत्व विभाग ने मंदिर का मूल स्वरूप बनाए रखने के लिए इसकी अपलिफ्टिंग की योजना बनाई।
लोहे के जैक लगाकर मंदिरों को सीधा कर रहे
यह काम ग्रामीण अभियंत्रण सेवा विभाग के माध्यम से हरियाणा की शिव बिल्डिंग लिफ्टिंग वर्क्स द्वारा कराया जा रहा है। कंपनी के रामेश्वर सिसौदिया के नेतृत्व में श्रमिक मंदिर समूह के अलग-अलग मंदिरों की बुनियाद में लोहे के जैक लगाकर मंदिरों को सीधा कर रहे हैं।
अब तक समूह के दो मंदिरों को मूल स्वरूप दिया जा चुका है। यह काम पुरातत्व विभाग के अनुरक्षण सहायक किशोर किशन हिंदवाल की देखरेख में हो रहा है।
ऐहतियात के तौर पर विभाग के छायाकार विनोद गिरि गोस्वामी मंदिरों की फोटो और वीडियोग्राफी भी कर रहे हैं। इसे देखने के लिए स्थानीय लोगों में कौतूहल है। प्रतिदिन काफी लोग वहां पहुंच रहे हैं।
अन्य मंदिर भी अपलिफ्टिंग से पाएंगे मूल स्वरूप
पुरातत्व विभाग के अनुरक्षण सहायक सीएस चौहान ने बताया कि झुके मंदिरों को बगैर खुर्द-बुर्द किए अपलिफ्टिंग से मूल स्वरूप में लाने का राज्य में यह पहला प्रयास है।
उन्होंने बताया कि अन्य स्थानों में भी झुके मंदिरों को इसी तकनीक से मूल स्वरूप में स्थापित करने का विभाग प्रयास करेगा। श्री चौहान ने बताया कि मुंडेश्वर मंदिर समूह के अपलिफ्टिंग में करीब दो लाख रुपए खर्च आने का अनुमान है। अपलिफ्टिंग के बाद मंदिर की बुनियाद में ठोस पत्थरों की चिनाई की जाएगी।