केलांग। जनजातीय क्षेत्रों के होटलों में अभी तक लग्जरी टैक्स में छूट नहीं मिल पाई है। चुनावी साल में भाजपा सरकार ने प्रदेश के जनजातीय क्षेत्रों में चल रहे होटलों को लग्जरी टैक्स में दस साल तक छूट देने की घोषणा की थी। लेकिन अभी तक इसकी अधिसूचना जारी न होने से होटल व्यवसायी खुद को ठगा सा महसूस कर रहे हैं।
अधिसूचना जारी न होने से आबकारी एवं कराधान विभाग ने जनजातीय क्षेत्रों के होटल कारोबारियों से टैक्स वसूलना शुरू कर दिया है। केलांग में कार्यरत विभाग के निरीक्षक स्वराज ने कहा कि इस संदर्भ में सरकार की ओर से कोई अधिसूचना जारी नहीं हुई है। लिहाजा, विभाग पहले की तरह ही होटल संचालकों से लग्जरी टैक्स वसूल रहा है। जनजातीय जिलों में मौजूदा समय में करीब 200 होटल हैं। इन्हें हर माह आमदनी का 10 फीसदी लग्जरी टैक्स के रूप में चुकाना पड़ता है।
विधानसभा सत्र में लग्जरी टैक्स में छूट देने की घोषणा के साथ ही बेरोजगार क्षेत्र के कई युवकों ने इस व्यवसाय की ओर रुख किया था। लेकिन छूट की घोषणा के बावजूद टैक्स वसूले जाने से होटल व्यवसायियों में सरकार के खिलाफ भारी रोष है। चुनावी साल में कांग्रेस ने इसे भाजपा को घेरने के लिए मुद्दा बना लिया है। यूथ कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष सुरेश कारदो ने कहा कि भाजपा सरकार विकास को लेकर पहले ही जनजातीय क्षेत्रों के साथ भेदभाव की नीति अपना रही है। मुख्यमंत्री बनने के बाद उन्होंने आज तक चंद घंटे को छोड़कर यहां के लोगों की समस्याओं की ओर ध्यान देना मुनासिब नहीं समझा। घोषणा के बावजूद आबकारी एवं काराधान विभाग जनजातीय क्षेत्रों के होटलियरों से लग्जरी टैक्स वसूला जा रहा है।
होटलियर्ज एसोसिएशन के महासचिव नोरबू थोलग्पा, सदस्य अमर, टशी, रिंचेन और विनोद ने कहा कि प्रदेश सरकार ने इस तबके के साथ धोखा किया है। सरकार सिर्फ वोट बैंक की जुगत कर रही है। कारदो ने सरकार को चेताया है कि अगर एक सप्ताह के भीतर सरकार घोषणा को अमलीजामा नहीं पहनाती है तो जनजातीय जिलों के होटलियरों के साथ कांग्रेस सड़कों पर उतरकर सरकार के खिलाफ धरना प्रदर्शन करेंगे।