जम्मू। पैगंबर हजरत मोहम्मद साहब के नवासे हजरत इमाम हुसैन और उनके अनुयायियों की याद में रविवार को शहर में मातमी जुलूस निकाला गया। इसमें बच्चों से लेकर हर आयु वर्ग के शिया समुदाय के लोगों ने शिरकत कर मातम मनाया। शहर के विभिन्न इलाकों से छोटे-बड़े दर्जनों ताजिए निकाले गए।
रविवार दोपहर न्यू प्लाट, जानीपुर से अंजुमन ए हैदरी की ओर से शिया समुदाय के लोगों का मातमी धुनों के साथ जुलूस आगे बढ़ा। इसमें कारगिल, लद्दाख स्टूडेंट फेडरेशन के अलावा जम्मू, पुंछ, राजोरी आदि स्थानों से विद्यार्थियों सहित बड़ी संख्या में समुदाय के लोग शामिल हुए। समुदाय के लोग शरीर पर जख्म देकर हजरत इमाम हुसैन और उनके अनुयायियों की शहादत को याद कर रहे थे। मातम मनाने वालों में बड़ी संख्या में युवतियां और महिलाएं भी शामिल रहीं। इसके बाद पीर मिट्ठा स्थित इमाम बाड़ा में समुदाय के लोगों ने इकट्ठे होकर मातमी जुलूस को आगे बढ़ाया। इस दौरान शरीर पर जख्म देने से कई लोगों की हालत खराब हो गई थी, जिन्हें तुरंत उपचार के लिए ले जाया गया। वक्ताओं ने कहा कि इमाम हुसैन ने इसलाम को न सिर्फ बचाया, बल्कि दुनिया में बलिदान और शहादत का संदेश दिया। उन्होंने भाईचारे और सांप्रदायिक सौहार्द से भी सबको जोड़ा। जुलूस राजेंद्र बाजार, लखदत्ता बाजार से होता हुआ करबला कांप्लेक्स पर संपन्न हुआ। इस दौरान जगह जगह जुलूस में शामिल लोगों के लिए जलपान आदि की व्यवस्था की गई थी। जुलूस के साथ चिकित्सा टीम में डा. अशोक शर्मा, फार्मासिस्ट पवन शर्मा, अजय कुमार, रवेल चंद शामिल रहे। जुलूस रूट पर वाहनों की आवाजाही बंद रखी गई थी और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे।