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पीपुल्स कांफ्रेंस पर डोरे डाल रहीं भाजपा-पीडीपी

Jammu Updated Wed, 30 Jul 2014 05:31 AM IST
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जम्मू। जम्मू कश्मीर में अगामी विधानसभा चुनाव के लिए बन रही रणनीति में छोटे दलों की अहमियत अचानक बढ़ गई है। संख्या बल के गणित ने बड़े दलों को छोटे दलों और क्षत्रपों से गठबंधन को मजबूर कर दिया है। पीडीपी ने चुनाव बाद कांग्रेस से गठबंधन का विकल्प खुला रखा है लेकिन छोटे दलों को लुभाने का कोई मौका चूकना नहीं चाहती। भाजपा का मिशन 44 घाटी और लद्दाख में खाता खोले बगैर पूरा नहीं हो सकता। नतीजतन पार्टी ने पीपुल्स कांफ्रेंस से समझौते की पहल की है। इस पहल के बाद पीडीपी सक्रिय हुई और पीपुल्स कांफ्रेंस के संपर्क साधा। कांग्रेस पहले ही सीपीएम के अलावा क्षत्रपों से गठबंधन की पृष्ठभूमि तैयार कर चुकी है।
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भाजपा के महासचिव जेपी नड्डा की पीपुल्स कांफ्रेंस के नेता सज्जाद लोन से उनके श्रीनगर आवास पर मुलाकात हुई जिसमें भावी गठबंधन पर विस्तार से चर्चा की गई। भाजपा चुनाव बाद पीपुल्स कांफ्रेंस का समर्थन चाहती है। पीपुल्स कांफ्रेंस का उत्तरी कश्मीर के कुपवाड़ा जिले की पांच सीटों पर खासा प्रभाव माना जाता है। इस पार्टी के नेता सज्जाद लोन पहले अलगाववादी गुट में थे और मुख्य धारा की राजनीति में हैं। उनके पिता अब्दुल गनी लोन की हत्या 2002 में हो गई थी। लोन के भाई बिलाल गनी वर्तमान में उदारवादी हुर्रियत कांफ्रेंस के मीरवाइज उमर फारूक के साथ हैं। नड्डा और लोन की मुलाकात की पृष्ठभूमि छह महीने से तैयार की जा रही थी जिसे अब सफलता मिली है।
लोकसभा चुनाव में घाटी की सभी तीन सीटें जीत चुकी पीडीपी विधानसभा चुनाव में कोई चूक नहीं करना चाहती। इस वजह से नड्डा और लोन की मुलाकात ने पीडीपी आलाकमान की नींदें उड़ा दीं। बाद में बांदीपोरा से पीडीपी विधायक निजामुद्दीन भट्ट ने पीपुल्स कांफ्रेंस नेता सज्जाद लोन से मुलाकात कर समझौते की संभावना तलाशी। भट्ट पहले पीपुल्स कांफ्रेंस में रह चुके हैं इसलिए पीडीपी आलाकमान ने उन्हें ही लोन के पास भेजा। पीडीपी को लोकसभा चुनाव में विधानसभा की 39 सीटों पर बढ़त मिली थी जिसमें जम्मू संभाग की दो सीटें भी शामिल हैं। पीडीपी के हौसले बुलंद हैं लेकिन उसे इस बात का अहसास भी है कि चुनाव बाद गठबंधन के बगैर सत्ता तक पहुंचना आसान नहीं है। लिहाजा जुगाड़ गणित अभी से अजामाया जाने लगा है।
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भाजपा को लोकसभा चुनाव में विधानसभा की 41 सीटों पर बढ़त मिली हैं। भाजपा इस आकंड़े से उत्साहित होकर 87 सीटों की विधानसभा में 44 सीटें हासिल कर सरकार बनाने की रणनीति पर काम कर रही है। कांग्रेस ने नेशनल कांफ्रेंस से नाता तोड़ लिया है और अब पूरी रियासत में सम्मेलन कर वोट बैंक को गोलबंद करने में जुटी है। कांग्रेस के लिए चुनाव बाद पीडीपी और नेकां में से किसी भी के साथ जाने में कोई परहेज नहीं है लेकिन सारा गणित जम्मू संभाग में पार्टी के प्रदर्शन पर निर्भर करेगा।
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