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चलता चल

Anil Sinha

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            पथिक तू चलता चल,
        
                                                    
                            
पथिक तू बढ़ता चल,
न सोच की आगे क्या होगा,

मत रूक, तू आगे चलता चल
मिलेंगे घात और प्रतिघात तुम्हें
पथ न होगा कोई सरल,
पर डरना नहीं तुम्हें है
झुकना नहीं तुम्हें है

कठिनाइयों को पार लगाता
पथ पर तू बस बढ़ता चल,
पथिक तू चलता चल
शान्ति करेगी क्रंदन पुकार
अशांति से होगा साक्षात्कार
आँखों में नींद नही होगी

पर उम्मीदों के सपने होंगे
संग ले उन सपनो को तुम
आगे को तू बस बढ़ता चल
पथिक तू चलता चल
माना कि पथ विकट होगा
काँटों से सिंचित होगा
पर चलना मत तू छोड़ पथिक

मत आगे बढ़ना रोक पथिक
राहें फिर समतल होंगी
चोटी तक मार्ग प्रशस्त होगा
विजय तुम्हारी राह तकेगी

सपने सच हो जाएँगे
रूकना मत, तू चलता चल
आगे बस तू बढ़ता चल,
पथिक तू चलता चल
पथिक तू बढ़ता चल ।

अनिल

- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

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