विज्ञापन

खट खट

Ham shayr

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            आज भागे जब बच्चे किसी अनजान घर की घंटी बजा के
        
                                                    
                            
कुछ बच्चे खुश थे और कुछ डर से गये थे
एक एहसास उस बूढ़ी माँ को भी हआ की शायद ये शैतान बच्चे है

पर वो भुलाना चाहती थी इन बातों को
रोक लेना चाहती थी इन सच्चाई भरे एहसासो को
और हो गयी वो खुश यह सोच कर के आगया शायद मेरा फौजी बेटा
आगया शायद मेरा फौजी बेटा जो आज तक घर नही लौटा है

आस में फिर इस उसने अपने हर जोर्डो के दर्द को भुला है
और भाग के दरवाजा खोलने की जल्दी मे आपना शॉल तक छोरा है
दरवाजा खोल के देखा तो आज भी नही था मेरा फौजी बेटा
बगल मे देखी तस्वीर और ज़हन मे फिर से यादें हो गयी
जो साल भर पहले आयी थी शहीद लाश उसकी भी अंगारे हो गयी।

-Akshat Mehrotra


- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें
5 वर्ष पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all