टुटे दिल की अरमान नहीं होती।
बिगड़े फुल की पहचान नहीं होती।
प्यासे मन की आस नहीं होती।
टुटे मन की विश्वास नहीं होती।
सुखी बाग में हरियाली नहीं आती।
बुढ़ी हड्डी में जवानी नहीं आती।
मन के जैसा मक्कारी नहीं होती।
अपनों के जैसा वफादारी नहीं होती।
कलम से-अनमोल मुन्ना(एकलव्य)
ग्राम कटेया छपरा सारण बिहार
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