भ्रम है कि सूरज निकलने से
जाता है अंधेरा
नहीं जाता अंधेरा तब तक
जब तक कि अपनी आंखे खोलकर
नहीं देख लेते आप उजाला
यही अंधेरे-उजाले का खेल ही तो है
जो करता है आपकी उम्र को तमाम
अपनी तरफ से आप कर लें
चाहे फिर कोई भी ताम-झाम
समझ लें जीवन को थोड़ा सा
तो जीना हो जाएगा आसान
वरना क्या रखा है
छोड़-छाड़ कर चले जाना है एक दिन
सभी साजो-सामान
जीवन की आंच से तपी आत्मा ही
बस जाएगी साथ
समझिए इसे गहराई से
पाना है यदि आपको परमार्थ।