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यह जीवन

Pradeep Mukherjee

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            भ्रम है कि सूरज निकलने से
        
                                                    
                            
जाता है अंधेरा
नहीं जाता अंधेरा तब तक
जब तक कि अपनी आंखे खोलकर
नहीं देख लेते आप उजाला
यही अंधेरे-उजाले का खेल ही तो है
जो करता है आपकी उम्र को तमाम
अपनी तरफ से आप कर लें
चाहे फिर कोई भी ताम-झाम
समझ लें जीवन को थोड़ा सा
तो जीना हो जाएगा आसान
वरना क्या रखा है
छोड़-छाड़ कर चले जाना है एक दिन
सभी साजो-सामान
जीवन की आंच से तपी आत्मा ही
बस जाएगी साथ
समझिए इसे गहराई से
पाना है यदि आपको परमार्थ।
3 वर्ष पहले
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