विज्ञापन

कसक

Prakash Ranjan

Mere Alfaz
विज्ञापन
                                    
                                                                        
                            विचारों का अंतरद्वंद
        
                                                    
                            
वो मीठी सी कसक
भावों का अतिरेक और
धडकनों का शोर

अंतर्मन को छेदती हुयी
कजरारी शो़ख आंखें
मंत्रमुग्ध करती हुयीे
स्निग्ध सी मुस्कान
कानों मे रस घोलती
पाजेब की रूनझुन
और नथुनों में समाती
तन-मन को सिहराती
वो मादक सी देहगंध

तुम्हारा निश्छल प्रेम

सब बहराना चाहती है
बनकर एक प्यारी सी कविता
कोई कालजयी महाकाव्य
जिसके हर अक्षरों सब पन्नों मे
मुस्कुराता हो तुम्हारा चेहरा
पर डरता हूं लोग कही
उन आड़ी-तिरछी-बेजान लकीरों मे
निहित कोई अर्थ ढूंढेंगे और
खारिज कर देंगे मेरी 'प्रेमकविता'
मेरे असफल प्रेम की तरह

- प्रकाश रंजन 'शैल' पटना

हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
8 वर्ष पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Aalam-e-Ghazal Parvez

265 कविताएं

View Profile

Yunush khan

7864 कविताएं

View Profile

Anamika singer

344 कविताएं

View Profile