विज्ञापन

शायरी.....

Ram autar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            1
        
                                                    
                            
क्यो सोचते काल आएगा
याद रखना दिन बीत जाएगा
रह गए देखते निहारते खुद को
नाम जमी से मिट जाएगा
2
जिया जो खुद के खातिर
वो अभिमानी क्या जिया
जिया जो दो पल सब के खातिर
कोटि जन्म का प्यार मिला
3
माँ का ममता भूल गए
हुए जवान मुह फूल गए
माँ ने झेला बरसो तुम को
तुम झेले तो मुह खोल गए

हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें। 
5 वर्ष पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all