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स्मृतियाँ

ravi kant

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            हृदय पटल को स्पर्श करती वो स्मृतियाँ
        
                                                    
                            
निरन्तर धड़कन की मधुर आवाज़ बन 
सुनाई पड़ती हैं कानों में हल्के-हल्के
बरबस ही उँढेल देता हूँ स्वयं को
उन मीठी स्मृतियों के बर्तन में 
घुलकर खो जाता हूँ उन में
जैसे नदी घुले सागर के जल में
मधुर स्मृतियाँ ही पूंजी जीवन की
कहो और स्थिर क्या है इस जग में ।

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5 वर्ष पहले
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