बेटियां घर की रौनक होती है,
बेटियां घर की शान
बिन बेटी के सूनी धरती,
सूना है जहान।
लक्ष्मी का अवतार कहीं तो,
कहीं दुर्गा का नाम,
बेटी का अपमान जो करते,
रहते वो कंगाल।
घर की बरकत,
घर की ख़ुशियां,
बिन बेटी के सूनी,
प्यार बांटती,
परिवार बनाती,
आंगन की है तुलसी।
दुःख सहती हैं,
चुप रहती हैं,
आंसू छुपा लेती हैं,
पालनहारी, अनपूर्णा,
देवी कहलाती हैं।
कवित्री:ऋतु कुमार
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