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पुराना ज़माना

SHIVAM NEGI

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            खुशी से आए थे, चले गए कहीं और,
        
                                                    
                            
बीत गया पुराना, आ गया नया दौर।
मुस्कुरा कर वह लम्हे आते हैं याद,
बस करते ही रह जाते हैं उनकी बात।
ना कोई अपना है, सब तो है पराए,
ना कोई साथ हैं, मैं ही हूं बस खुद का सहारा।
नहीं अब किसी से किसी का नाता,
सबको बस अपनी ख्वाइश है पूरी करना।
आंसू बह कर चले जाते हैं, खुशी भी कहीं चली जाती है।
रात आती है, दिन जाती है।
दिन जाती है, रात आती है।
बस पुराना ज़माना आता है याद।
3 वर्ष पहले
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