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जीवन यात्रा

shivani singh

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            पल पल तारे टूट रहे हैं किस्मत के गलियारे में।
        
                                                    
                            
सारे ख्वाब छिपे बैठे हैं जाने क्यों अँधियारे में।।

जाने क्या चाहा क्या पाया और भला क्या पाना है,
झूम रहा हर कोई नशे में जीवन भी मयखाना है,
बीच समन्दर प्यासा बैठा नाव दिखी मझधारे में।

सारे ख्वाब छिपे बैठे हैं जाने क्यों अँधियारे में।।

सजी धजी बचपन की डोली चली जवानी की हमजोली
सांसों की रफ्तार बढ़ी है लगी बुढ़ापे की जब गोली
जाने कब तक रहे बसेरा घर आँगन चौबारे में।

सारे ख्वाब छिपे बैठे हैं जाने क्यों अँधियारे में।।

डॉ.शिवानी सिंह



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