टूटे धागा प्रेम का
तो नफरत गाँठ बनाए
जो बधें गाँठ प्रेम की
जीवन सरस होई जाए
हर पोर मे रस मिले
गाँठ में रस ना मिल पाए
जो बाधु मैं हरि संग गाँठ
भगति अन्दर मन तक समाए
बहना बाधे राखी में गाँठ
विशवास दृढ़ हो जाए
दोस्ती की गाँठ बन,जब पकडे हाथ
तो दुनियां से भिड़ जाए
हर गाँठ में फर्क है
मतलब सब अपने मत बतलाए
जो आया समझ सुनील के
वो मतलब दिए बतलाए।
-सुनील कुमार