गुजर जाएगी ये काली रातें भी,
खत्म हो जाएंगी, बुरी बातें भी।
सूरज जब निकलेगा,
चमन फिर महकेगा।
धुंध छटेगी, बर्फ पिंघलेगी,
शुरुआत फिर से नई होगी।
जीवन फिर अंगड़ाई लेगा,
आएगी रौनक फिर से,
यही जग बधाई फिर से देगा।
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।