नगर निगम के पास फॉगिंग की 100 से अधिक मशीनें तो हैं, मगर कर्मचारी नहीं हैं।
फॉगिंग मशीनों को चलाने के लिए प्रशिक्षित कर्मचारियों की आवश्यकता होती है, लेकिन वह नगर निगम के पास नहीं हैं।
कर्मचारियों की कमी को पूरा करने के लिए कार्यदायी संस्थाओं के जरिए से काम चलाया जा रहा है।
फॉगिंग कर्मचारियों की भर्ती न होने के कारण यह समस्या दूर नहीं हो पा रही है। कर्मचारियों की तरह धन की कमी भी फॉगिंग के आड़े आ रही है। फॉगिंग में केमिकल के साथ ही डीजल भी मिलाया जाता है।
डेंगू को देखते हुए मच्छरों की रोकथाम के लिए 23 व्हीकल माउंटेड मशीनों (बड़ी मशीन) से शहर में बृहस्पतिवार से अभियान शुरू किया गया है, लेकिन इन मशीनों को चलाने के लिए नगर निगम के पास एक भी प्रशिक्षित कर्मचारी नहीं है।
इन मशीनों को चलाने के लिए कर्मचारी कार्यदायी संस्था से लिए गए हैं। फॉगिंग कार्य से जुड़े एक कर्मचारी ने बताया कि नगर निगम में फॉगिंग कार्यदायी संस्थाओं के कर्मचारियों के भरोसे है।
फॉगिंग का काम स्वास्थ्य विभाग के गैंगकुलियों को करना चाहिए, मगर वह स्वास्थ्य विभाग की बजाए इधर-उधर तैनात हैं। ऐसे में फागिंग केलिए कर्मचारी कार्यदायी संस्था से लिए जाते हैं।
बड़ी मशीनों की तरह ही छोटी मशीन (हैण्डी मशीन) को चलाने के लिए पर्याप्त कर्मचारी नहीं हैं। इसलिए जोनल स्तर पर भी कार्यदायी और संविदा कर्मचारियों की मदद ली जा रही है।
पार्षद से लिया जाता है प्रमाण पत्र
नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. पीके सिंह का कहना है फागिंग प्रभावी तरह से हो, इसके लिए पार्षदों को निगरानी में इसे कराया जा रहा है। जिस वार्ड में फॉगिंग होती है, उस वार्ड से पार्षद से फागिंग करने वाले कर्मचारी को प्रमाण पत्र भी लाना होता है।
इससे तय होता है कि फॉगिंग कार्य में कोई गड़बड़ी नहीं हो रही है। ऐसे में यदि किसी को लगता है किसी क्षेत्र में फागिंग नहीं हुई है तो वह अपने पार्षद, जोनल अधिकारी से यह उनसे सम्पर्क कर सकता है।