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क्या खूब समझा माननीयों ने दंगा पीड़ितों का दर्द!

टीम डिजिटल/लखनऊ Updated Thu, 19 Sep 2013 02:37 PM IST
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विधानसभा में बुधवार को मुजफ्फरनगर दंगे पर दो घंटे से भी अधिक समय चली बहस के बावजूद दंगा पीड़ितों का दर्द सामने नहीं आ पाया।
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इस मसले पर चर्चा में शामिल सदस्यों ने अपने दलीय हितों को ध्यान में रखते हुए विरोधी दलों पर हमले किए।

चर्चा में दखल देते हुए मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने जरूर शिविरों में फंसे दंगा पीड़ितों में भरोसा कायम करने और उन्हें घर भेजने की बात कही। उन्होंने कहा कि फिलहाल यही उनकी प्राथमिकता है और पूरे सदन की जवाबदेही भी।

नेता प्रतिपक्ष स्वामी प्रसाद मौर्य ने मुजफ्फरनगर हिंसा को काबू में करने में प्रशासनिक विफलता के लिए सरकार की जोरदार घेरेबंदी की।

नेता प्रतिपक्ष ने दंगा पीड़ितों, गंभीर जख्मी और मामूली घायलों के लिए अधिक मुआवजे की मांग तो की पर उनका ज्यादा जोर सरकार और प्रशासन की नाकामी गिनाने पर ही रहा।
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चर्चा में शामिल होने वाले भाजपा विधायक हुकुम सिंह अपने पूरे भाषण में खुद को निर्दोष साबित करने की भूमिका तैयार करते दिखे।

उन्होंने घटना का सिलसिलेवार जिक्र तो किया लेकिन दंगे के बाद पैदा हुए हालात पर वे अधिक कुछ कह नहीं पाए।

सत्तापक्ष की ओर से सरकार का जोरदार बचाव करते हुए बेसिक शिक्षा मंत्री राम गोविंद चौधरी ने भी भाजपा पर जमकर तीर चलाए।

कांग्रेस के प्रदीप माथुर ने सपा सरकार और बीजेपी दोनों पर निशाना साधा। लेकिन मुजफ्फरनगर के दंगा पीड़ितों का दर्द उनके भाषण से भी नदारद रहा।

विपक्षी दलों की मांग पर कार्यमंत्रणा समिति में दंगे पर चर्चा कराने को लेकर बात हुई थी लेकिन तब यह तय हुआ था कि सदन में चर्चा के माध्यम से इस पर सहमति ली जाएगी।

लेकिन शून्य प्रहर में चर्चा के लिए आए प्रस्ताव पर विधानसभा अध्यक्ष माताप्रसाद ने अचानक बहस शुरू कराने का फैसला ले लिया। इस पूरी चर्चा में भाजपा सत्ता पक्ष और विपक्ष के पूरी तरह निशाने पर आ गया।

उस पर चौतरफा हमले हुए। सत्तापक्ष ने उस पर सियासी फायदे के लिए दंगा भड़काने का आरोप लगाया, वहीं बसपा, कांग्रेस और रालोद ने भी उसे इसके लिए दोषारोपित किया।

किसने क्या कहा?

सपा की पिछली सरकारों में भी सौहार्द्र तोड़ा गया। सीएम ने कहा है कि इस दंगे के पीछे बाहरी लोगों का हाथ है। हम मुख्यमंत्री से पूछना चाहते हैं उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं हुई। सरकार चुप क्यों बैठी रही?
-स्वामी प्रसाद मौर्य, नेता प्रतिपक्ष

बसपा ने सपा पर बीजेपी से समझौते का आरोप लगाया है। राखी बंधवाएं आप और समझौता हमारा।
-आजम खां, संसदीय कार्यमंत्री

कैसे हुई गलत नामजदगी। किसके कहने पर छोड़े गए सात नामजद लोग। सबको मालूम है लखनऊ की सल्तनत कब हिलती है। स्थानीय प्रशासन में किसी तरह का कोआर्डिनेशन नहीं था। संवेदनशील स्थानों पर नहीं थी सुरक्षा।
-हुकुम सिंह, नेता भाजपा
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