हिमाचल विस चुनावों में भाजपा के सीएम उम्मीदवार प्रेम कुमार धूमल को हराने वाले कांग्रेस उम्मीदवार राजेंद्र राणा का राजनीतिक सफर काफी रोचक है।
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साल 2007 में सत्तासीन होने पर प्रेम कुमार धूमल ने ही राजेंद्र राणा को हिमाचल प्रदेश मीडिया बोर्ड का वाइस चेयरमैन बनाया, लेकिन कुछ समय के बाद ही राजेंद्र राणा को यह पद छोड़ना पड़ा।
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जब भाजपा ने राजेंद्र राणा को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाया तो राणा अकेले पड़ चुके थे। साल 2012 में उन्होंने सुजानपुर विधानसभा सीट से बतौर निर्दलीय चुनाव लड़ा।
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उस समय उनके सामने भाजपा की सीपीएस रहीं उर्मिल ठाकुर और कांग्रेस की सीपीएस रही अनीता वर्मा चुनाव मैदान में सामने थीं, लेकिन उन्होंने दोनों को धूल चटाते हुए 14166 मतों से विजय हासिल की। चुनाव में यह बढ़त जिला हमीरपुर से सर्वाधिक और प्रदेश में चौथे नंबर पर रही।
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साल 2012 में मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के नेतृत्व में कांग्रेस सरकार बनी और राणा कांग्रेस के एसोसिएट विधायक बन गए। इस बीच साल 2014 में लोकसभा के चुनाव हुए। कांग्रेस ने हमीरपुर से जीत की हैट्रिक लगा चुके सांसद अनुराग ठाकुर के खिलाफ चुनाव मैदान में बतौर कांग्रेस प्रत्याशी राणा को उतारा। राणा को विधायक पद छोड़ना पड़ा।
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कांग्रेस ने राणा की धर्मपत्नी अनीता राणा को सुजानपुर सीट से उपचुनाव में बतौर कांग्रेस प्रत्याशी उतारा। लोस चुनावों के दौरान देश में जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लहर चल रही थी, उस वक्त कांग्रेस की अनीता राणा भाजपा के नरेंद्र ठाकुर से महज साढ़े पांच सौ मतों से चुनाव हार गईं। हार के बावजूद मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने राजेंद्र राणा को प्रदेश आपदा प्रबंधन बोर्ड के उपाध्यक्ष पद से नवाजा।
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उन्होंने अब भाजपा के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार को हराकर प्रदेश की राजनीति में एक नया इतिहास रच दिया है। यह भी तब है जब भाजपा को प्रदेश में पूर्ण बहुमत मिला है।
प्रेम कुमार धूमल का राजनीतिक परिदृश्य- प्रेम कुमार धूमल ने साल 1984 में पहली बार लोकसभा का चुनाव लड़ा। वह पहला ही चुनाव कांग्रेस के प्रत्याशी मेजर जनरल विक्रमजीत सिंह कंवर से हार गए। इसके बाद उन्होंने लोकसभा के चुनाव में साल 1989 में कांग्रेस प्रत्याशी नारायण चंद पराशर को 37 हजार मतों के अंतर से हराया। इसके बाद धूमल ने लोकसभा के 1991 और 2007 के चुनाव में भी विजय हासिल की। विधानसभा का पहला चुनाव उन्होंने साल 1998 में जीता। इसके बाद साल 2003, 2007 और 2012 में विस का चौथा चुनाव जीता।