शिमला। हजारों जेबीटी और सीएंडवी शिक्षकों की पदोन्न्नति का रास्ता साफ हो गया है। इनकी प्रमोशन के लिए अध्यापक पात्रता परीक्षा (टेट) और 50 प्रतिशत अंकों के साथ बीए और बीएससी की अनिवार्यता की शर्तों को हटा दिया है। ये शर्तें 3 सितंबर, 2001 से पहले के जेबीटी और सीएंडवी शिक्षकों पर लागू होंगी। 3 सितंबर, 2001 से 23 अगस्त, 2011 के मध्य लगे शिक्षकों को भी इन दो शर्तों से राहत दी गई है।
इस समयावधि के दौरान लगे करीब 7 हजार शिक्षकों को 6 माह का बेसिक कोर्स करना होगा। यह बेसिक कोर्स राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) से मान्यता प्राप्त विशेष प्रशिक्षण संस्थान या आधारभूत अध्यापक पाठ्यक्रम (बीटीसी) करना होगा। 2011 के बाद लगे शिक्षकों पर आरएंडपी के नए रूल ही लागू होंगे। सरकार ने इस संबंध में 26 अप्रैल, 2014 को अधिसूचना जारी की है। पदोन्नति नियमों में परिवर्तन की इस अधिसूचना से दोनों वर्गों के करीब 16-16 हजार शिक्षकों की 1999 से रुकी प्रमोशन प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। इसके बाद ये शिक्षक टीजीटी बनेंगे। प्रदेश में इस वक्त हजारों की संख्या में टीजीटी पद खाली पड़े हैं। हिमाचल राजकीय अध्यापक संघ ने सरकार और शिक्षा विभाग के आला अधिकारियों का आभार जताया है।
---
संघ की लंबी लड़ाई के बाद यह सफलता मिली है। इससे करीब 32 हजार शिक्षक लाभान्वित होंगे। 1999 से पदोन्नतियों का प्रोसेस रुका हुआ है वह भी शुरू हो जाएगा। ये शर्तें 2011 के बाद के सीएंडवी और जेबीटी पर लागू नहीं होंगी। विभाग से आग्रह है कि वे प्रमोशन प्रक्रिया शुरू कर हजारों शिक्षकों को राहत दे।
- वीरेंद्र चौहान, अध्यक्ष, हिमाचल राजकीय अध्यापक संघ।