अगर सुप्रीम कोर्ट में यह केस वापस हो जाता है तो प्रदेश के हजारों अस्थायी शिक्षकों को लाभ होगा। प्रदेश के सरकारी स्कूलों में साढ़े 13 हजार शिक्षक अस्थायी तौर पर तैनात हैं। याचिकाकर्ता पंकज कुमार ने साल 2013 में इस मामले को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।
आरोप लगाया था कि इस दौरान चहेतों को नौकरी दी गई है जबकि पात्र शिक्षक बाहर कर दिए गए। हिमाचल हाईकोर्ट ने 2014 में अस्थायी शिक्षकों के हक में फैसला सुनाया था। सरकार ने इसके बाद इनके लिए पॉलिसी तैयार कर दी थी।
प्रदेश हाईकोर्ट के फैसले के बाद ही हजारों पीटीए शिक्षकों को अनुबंध पर लाया गया। इसी दौरान हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई। सुप्रीमकोर्ट ने राज्य हाईकोर्ट के आदेशों पर रोक लगाते हुए यथास्थिति बनाए रखने के आदेश जारी किए। इसके बाद से यह मामला सुप्रीमकोर्ट में विचाराधीन है।